ग्वालियर में अवैध निर्माण पर हाईकोर्ट सख्त, नगर निगम को फटकार: इंदौर त्रासदी से लिया जाए सबक
ग्वालियर
ग्वालियर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने शहर में अवैध निर्माण के एक मामले की सुनवाई के दौरान ग्वालियर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी की है। कोर्ट ने इंदौर के भागीरथपुरा हादसे का उल्लेख करते हुए कहा कि नगर निगम यदि अपने वैधानिक दायित्वों का पालन नहीं कर रहा।
हाईकोर्ट ने कहा कि भागीरथपुरा हादसे में कई लोगों की जान गई, जिसे इंदौर पीठ ने संज्ञान में लिया है। यह स्थिति अपने आप बताती है कि अवैध निर्माण को समय रहते नहीं रोका गया, तो बड़ी त्रासदी से इंकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने ग्वालियर नगर निगम की स्थिति को भी चिंताजनक बताया।
आयुक्त को चेतावनी, शून्य सहनशीलता अपनाने के निर्देश
कोर्ट ने नगर निगम आयुक्त से कहा कि वे इंदौर की त्रासदी से सबक लें और शहर में अवैध निर्माण के प्रति शून्य सहनशीलता की नीति अपनाएं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि नगर निगम समय रहते कार्रवाई नहीं करता है, तो ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति से इंकार नहीं किया जा सकता।
दुकानदारों के बीच विवाद से जुड़ा है मामला
मामला दो दुकानदारों निहाल चंद और गोपाल चंद के बीच अवैध निर्माण को लेकर चल रहे विवाद से जुड़ा है। बताया गया कि दीवारें हटाकर 8 दुकानों को 5 दुकानों में बदल दिया गया था और दुकानों के बाहर टीनशेड का अवैध निर्माण कर दिया गया था।
यह विवाद सबसे पहले जिला न्यायालय पहुंचा, जहां छठवें अपर जिला न्यायाधीश ने दुकानों के बाहर किए गए निर्माण को हटाने और आंतरिक दीवारों का पुनर्निर्माण कराने के आदेश दिए थे। इसके बाद निहाल चंद ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की, जहां मामले पर विस्तार से सुनवाई हुई।
15 दिन में अवैध ढांचा हटाने के आदेश
हाईकोर्ट ने दुकानों के बाहर बिना अनुमति बनाए गए ढांचे को अवैध ठहराते हुए 15 दिनों के भीतर हटाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि तय समयसीमा में अवैध निर्माण नहीं हटाया गया, तो 16वें दिन नगर निगम स्वयं कार्रवाई कर ढांचा हटाएगा और उसका खर्च संबंधित दुकान मालिकों से वसूला जाएगा।
‘बिल्डिंग परमिशन कोई रस्म नहीं’
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि बिल्डिंग परमिशन कोई औपचारिकता नहीं है। अनुमति देते समय एफएआर, भूमि विकास नियम और मास्टर प्लान जैसे सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जाना आवश्यक है। यदि कोई व्यक्ति इन नियमों का उल्लंघन कर निर्माण करता है, तो उसे हटवाना नगर निगम की कानूनी जिम्मेदारी है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि ग्वालियर नगर निगम ने अपने दायित्वों का समुचित निर्वहन नहीं किया, जिसके कारण शहर में अवैध निर्माण पनपते रहे।
