रिटायर्ड मेजर जनरल ने रंधावा के बयान को गैरजिम्मेदाराना बताते हुए दी कड़ी प्रतिक्रिया

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जयपुर

कश्मीर के पहलगाम में हुए हालिया आतंकी हमले के बाद पूरे देश में गुस्से और एकजुटता का माहौल है। आतंकियों के इस हमले ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव को बढ़ा दिया है। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा के एक बयान ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। रंधावा ने अग्निवीर योजना पर सवाल उठाते हुए कहा था कि चार साल के लिए कोई अपनी जान दांव पर नहीं लगाएगा, अग्निवीर योजना को तुरंत बंद किया जाना चाहिए। उनके इस बयान को लेकर सेना के जज्बे और मनोबल पर चोट करने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

रिटायर्ड मेजर जनरल अनुज माथुर ने रंधावा के बयान को गैरजिम्मेदाराना करार देते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि आज देश को एकजुट होकर सेना के साथ खड़े होने की जरूरत है, न कि उनके साहस और बलिदान पर सवाल उठाने की। मेजर जनरल ने कहा कि हर अग्निवीर सैनिक देशभक्ति से भरा होता है, वह किसी नौकरशाही की चाहत में नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा की भावना से सेना में आता है। उन्होंने दो टूक कहा कि भारतीय सेना का मोरल कोई चाय का प्याला नहीं है, जो हर घूंट के साथ नीचे गिर जाए।

तीन मोर्चों पर लड़ाई की तैयारी में भारत
रिटायर्ड मेजर जनरल अनुज माथुर ने अमर उजाला से खास बातचीत में बताया कि पाकिस्तान के खिलाफ भारत पहले ही तीन स्तरों पर कार्रवाई शुरू कर चुका है। पहला है आर्थिक युद्ध (इकोनॉमिक वॉरफेयर), जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 1960 की जल संधि को रद्द कर दिया है, जिससे पाकिस्तान की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था पर जबरदस्त असर पड़ेगा। पाकिस्तान की ऊर्जा और सिंचाई का मुख्य स्रोत यही नदियां हैं और जल आपूर्ति बंद होने से पाकिस्तान में त्राहिमाम मच सकता है।

दूसरा मोर्चा है मनोवैज्ञानिक युद्ध, जिसमें भारत ने पाकिस्तानी डिप्लोमेट्स को वापस भेजने और देश में मौजूद पाकिस्तानी नागरिकों को 48 घंटे के भीतर भारत छोड़ने के आदेश जारी कर दिए हैं। इससे पाकिस्तान में भय और अनिश्चितता का माहौल फैल गया है।

इसके साथ ही तीसरा और सबसे अहम मोर्चा है सैन्य ताकत का प्रदर्शन। भारतीय नौसेना ने अरब सागर में आईएनएस सूरत जैसे अल्ट्रा-मॉडर्न युद्धपोत को तैनात कर मिसाइल परीक्षण किया है। मेजर जनरल अनुज माथुर ने कहा कि पाकिस्तान आज भी 4 दिसंबर 1971 की रात को नहीं भूल पाया है, जब भारतीय नौसेना ने कराची पोर्ट को तबाह कर दिया था। आज हमारी नौसेना तब से 50 गुना ज्यादा ताकतवर हो चुकी है।

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