दलदल से निकलना है…’ शादी के लिए PAK से क्यों आईं 150 लड़कियां?

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नई दिल्ली
सोशल मीडिया पर इन दिनों पाकिस्तान से भारत आने वाले दुल्हनों की काफी चर्चा हो रही है. बताया जा रहा है कि 300 हिंदू लड़कियां शादी करने के लिए भारत आ रही हैं. दरअसल, वीजा की वजह से वो पाकिस्तान से भारत नहीं आ पा रही थीं. तो समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर ये लड़कियां अभी क्यों आ रही हैं और इनकी शादियां भारत में किस वजह से हो रही है और किस तरह से ये भारत आ रही हैं… तो समझते हैं पाकिस्तान से भारत आ रही इन लड़कियों की कहानी…

कौन हैं ये पाकिस्तानी लड़कियां?
दरअसल, ये लड़कियां पाकिस्तान के सिंध प्रांत में रहने वाले सिंधी परिवारों से हैं और शादी के लिए यहां आ रही हैं. इन लड़कियों की भारत में पहले ही सगाई हो चुकी थी, लेकिन शादी के लिए वो वीजा की वजह से भारत नहीं आ पा रही थीं. इनमें किसी की शादी नागपुर में होनी थी, किसी की रायपुर, जोधपुर या पुणे में. ये ऐसे रिश्ते हैं जो अचानक नहीं बने, बल्कि पहले से तय थे और शादी की तैयारी चल रही थी. बस यहां ना पाने की वजह से शादी नहीं हो पा रही थी। 

इस बारे में समुदाय के विवेक कुकरेजा से बात की, जो लंबे समय से पाकिस्तानी अल्पसंख्यकों के लिए काम कर रहे हैं. साथ ही वो लंबे समय से इन लड़कियों को वीजा दिलवाने की कोशिश कर रहे हैं और उन्होंने गृह मंत्रालय से इन्हें वीजा दिलवाने की पेशकश की थी और अब उन्हें वीजा मिल गया है। 

विवेक कुकरेजा ने बताया कि सिंधी हिंदू परिवारों के बीच भारत और पाकिस्तान में रिश्तेदारी पुरानी है. कई परिवारों के रिश्तेदार दोनों तरफ रहते हैं. इसी वजह से पाकिस्तान के सिंध से भारत में शादी के लिए परिवारों का आना-जाना पहले भी होता रहा है. साथ ही उन्होंने बताया कि ये 150 लड़कियां हैं और उनके साथ एक 1 व्यक्ति और आया है. ऐसे में कुल 300 लोग हैं, जिसमें 150 लड़कियां हैं। 

फिर शादी क्यों नहीं हो पा रही?
मुश्किल तब शुरू हुई जब भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा और ऑपरेशन सिंदूर के बाद आवाजाही और वीजा पर पाबंदियां लग गईं. वाघा-अटारी के रास्ते से पाकिस्तान से भारत आने वाले लोगों की आवाजाही भी बंद हो गई. इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ा, जिनकी बेटियों की भारत में शादी तय थी. सगाई हो चुकी थी, रिश्ता तय था, परिवार शादी की तैयारी कर रहे थे, लेकिन दुल्हन भारत नहीं आ पा रही थी. सामुदायिक नेता राजेश झाम्बिया के मुताबिक, उस वक्त करीब 150 ऐसी लड़कियां थीं, जिनकी शादी भारत में होनी थी और उनकी प्रक्रिया बीच में अटक गई थी। 

अब कैसे आ रही हैं?
जब मामला लगातार अटका रहा तो सिंधी समुदाय ने रायपुर स्थित संत युधिष्ठिरलाल शादानी से संपर्क किया. वे पाकिस्तान के सिंध प्रांत के घोटकी स्थित शादानी दरबार के आध्यात्मिक प्रमुख हैं. समुदाय ने उन लड़कियों की सूची तैयार की, जिनकी भारत में सगाई हो चुकी थी और शादी होनी थी. इसके बाद यह सूची गृह मंत्रालय तक पहुंचाई गई और सरकार से अनुरोध किया गया कि इन लड़कियों को शादी के लिए भारत आने की अनुमति दी जाए। 

आखिरकार सरकार की ओर से इन दुल्हनों और उनके परिवार के एक सदस्य को भारत आने की अनुमति मिली. लेकिन एक शर्त थी कि उन्हें हवाई रास्ते से भारत आना होगा. अभी जो वीजा मिल रहे हैं, उनमें जमीन के रास्ते भारत जाने की परमिशन नहीं मिलती. अभी दुबई, श्रीलंका के रास्ते भारत आते हैं. ऐसे में ये लड़कियां भी इन रूट के जरिए यहां आई हैं। 

भारत में ही क्यों कर रही शादियां?
इस सवाल का जवाब सिर्फ 'शादी' नहीं है. विवेक कुकरेजा ने बताया, 'भारत और पाकिस्तान के सिंधी हिंदू परिवारों के बीच दशकों पुराने रिश्ते हैं. कई परिवारों के रिश्तेदार भारत में आकर बस चुके हैं, लेकिन उनके परिवार के कुछ सदस्य अब भी पाकिस्तान में रहते हैं. इसलिए भारत में रिश्ता मिलना कोई असामान्य बात नहीं है. इसके अलावा, पाकिस्तान में रहने वाले कई हिंदू परिवार वहां के मौजूदा हालात से परेशान हैं. अल्पसंख्यक होने की वजह से उन्हें सामाजिक और धार्मिक स्तर पर कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में भारत में शादी सिर्फ एक पारिवारिक रिश्ता नहीं, बल्कि कई लोगों के लिए बेहतर और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद भी बन जाती है। 

पहले कैसे आते थे? 

इन परिवारों के लिए भारत आना पहले इतना मुश्किल नहीं था. सिंध से आने वाले परिवार वाघा-अटारी बॉर्डर के रास्ते भारत आते थे. शादी होती थी और फिर लोग वापस भी चले जाते थे. लेकिन पहलगाम अटैक के बाद सीमा मार्ग बंद होने के बाद सीधे भारत आने का रास्ता बंद हो गया। 

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