हीर–रांझा और लैला–मजनूं की विरासत में साँस लेता जयपुर तमाशा: 250 वर्षों की रंगमंचीय परंपरा
जयपुर राजस्थान की राजधानी जयपुर लोक एवं प्रदर्शन आधारित कलाओं का प्रमुख केंद्र रही है। ग्रामीण अंचलों में जन्मी अनेक लोक कलाएं यहां संरक्षण और निरंतर मंचन के कारण परिष्कृत … Read More
