रूस ने भारत को दिया सस्ते तेल का बड़ा ऑफर, एक के बाद एक डील से बदले ऊर्जा समीकरण

Share on Social Media

नई दिल्ली

ईरान जंग की वजह से इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार चढ़ रही हैं. इससे भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ता जा रहा है. उधर अमेर‍िका चाहता है क‍ि भारत वेनेजुएला और यूएस से तेल खरीदे. यह देखकर रूस ने भारत को बड़ा ऑफर द‍िया है. रॉयटर्स की र‍िपोर्ट के मुताब‍िक रूस ने भारत को सस्‍ते दाम पर तेल बेचना शुरू कर द‍िया है. इतना ही नहीं, चीन को भी वही ऑफर म‍िल रहा है। 

रॉयटर्स की र‍िपोर्ट के मुताबिक, रूसी यूराल्स क्रूड अब भारतीय और चीनी बंदरगाहों पर ब्रेंट ऑयल के मुकाबले सस्‍ते में बिक रही है. तेल कारोबार से जुड़े चार लोगों ने बताया क‍ि एशियाई रिफाइनरियों की ड‍िमांड अचानक कम हो गई है, इससे रूसी तेल पूरी मात्रा में नहीं न न‍िकल पा रहा है. मौका देखकर रूस ने भारत को यह बड़ा ऑफर द‍िया है. सूत्रों ने बताया क‍ि मार्च से भारत और चीन को यह सस्‍ता तेल म‍िल रहा है. पहले ब्रेंट क्रूड के मुकाबले रूसी तेल प्रीमियम पर बिक रहा था, क्योंकि मिड‍िल ईस्‍ट में जंग की वजह से तेल की सप्‍लाई बाध‍ित हुई थी. लेकिन अब रूसी क्रूड की मांग कम हो गई है क्योंकि एशियाई रिफाइनरियों ने अपने भंडार का इस्तेमाल करना शुरू कर द‍िया है. दूसरे विकल्प ढूंढ ल‍िए हैं और कुछ मामलों में उत्पादन भी घटाया है। 

क‍ितना सस्‍ता तेल मिल रहा
सूत्रों ने बताया. जुलाई और अगस्त में भारत के लिए डिलीवरी वाली यूराल्स की खेपें इस महीने ब्रेंट के मुकाबले प्रति बैरल 2 से 3 डॉलर की छूट पर बिकी हैं, जबकि अप्रैल और मई में यह प्रीमियम 7 से 8 डॉलर था. सूत्रों ने बताया. उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों में, जब कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण रूसी तेल उत्पादन घटा था, तब यूराल्स 7 से 8 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर बिक रही थी. पिछले साल जून से अगस्त में छूट करीब 1 से 3 डॉलर प्रति बैरल थी। 

चीन ने कर द‍िया था मना
चीन और भारत के बाजार एक-दूसरे के काफी करीब चलते हैं, लेकिन चीन की खरीद कम होने से सभी ग्रेड्स पर असर पड़ता है. चीन भारत से कम यूराल्स खरीदता है, लेकिन रूसी हल्के ग्रेड्स जैसे ईएसपीओ ब्लेंड, आर्कटिक और सखालिन क्रूड ज्यादा लेता है. कुछ मामलों में चीनी खरीदारों ने जून डिलीवरी वाली रूसी तेल की खेप लेने से मना कर दिया, एक सूत्र ने बताया, जिससे विक्रेता कीमत तय करने में कमजोर हो जाते हैं क्योंकि अन्यथा यह तेल फ्लोटिंग स्टोरेज में चला जाएगा. कुछ चीनी छोटी, स्वतंत्र रिफाइनरियां, जिन्हें टीपॉट्स कहा जाता है, कमजोर मुनाफे के कारण उत्पादन घटा रही हैं जिससे कच्चे तेल की कीमतें और कम हो गई हैं। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *