गढ़चिरौली में माओवादियों की गुप्त हथियार फैक्ट्री का भंडाफोड़, जंगल में जमीन के नीचे छिपा था जखीरा

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रायपुर
 नक्सल मोर्चे
पर मुस्तैद सुरक्षा बलों को माओवादियों के खिलाफ एक और बड़ी और रणनीतिक कामयाबी हाथ लगी है। गढ़चिरौली पुलिस ने नक्सलियों के एक गुप्त और अत्याधुनिक हथियार निर्माण कारखाने का पर्दाफाश करते हुए जंगल में छिपाकर रखी गई भारी मात्रा में युद्ध सामग्री और मशीनों को बरामद कर नष्ट कर दिया है। पुलिस प्रशासन के अनुसार, यह पूरी सफलता हाल ही में आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों से मिली बेहद सटीक और खुफिया जानकारी के बाद हाथ लगी है, जिससे सुरक्षा बलों पर होने वाले कई बड़े हमलों को समय रहते टाल दिया गया है।

माओवादियों से पूछताछ में खुलासा
दरअसल, माओवादी सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमला करने और विभिन्न हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए जंगलों में जमीन के नीचे हथियार और विस्फोटक छिपाकर रखते थे। इस बड़ी साजिश का खुलासा तब हुआ जब 16 मई 2026 को ' ऑपरेशन अंतिम प्रहार ' के तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से सुरक्षा एजेंसियों ने कड़ी पूछताछ की। पूछताछ के दौरान नक्सलियों ने स्वीकार किया कि बिनागुंडा क्षेत्र के घने जंगलों में हथियार बनाने का एक गुप्त ठिकाना सक्रिय है, जहां भारी मात्रा में खतरनाक उपकरण जमीन के नीचे दबाकर रखे गए हैं।

बीडीडीएस टीम ने घेरा जंगल
सटीक इनपुट मिलते ही गढ़चिरौली के पुलिस अधीक्षक के कुशल मार्गदर्शन में एक विशेष रणनीति तैयार की गई। 21 मई 2026 को विशेष अभियान दल गढ़चिरौली, प्राणहिता और बम निरोधक दस्ते की संयुक्त टीमों को सर्च ऑपरेशन के लिए रवाना किया गया। 22 मई को सुरक्षा बलों ने बिनागुंडा पुलिस सहायता केंद्र के उत्तर दिशा में स्थित जंगलों को चारों तरफ से घेर लिया। बीडीडीएस के जवानों ने जब आधुनिक मेटल डिटेक्टर्स और तकनीकी उपकरणों की मदद से सघन तलाशी अभियान चलाया, तो जमीन के नीचे छुपाए गए हथियारों के इस बड़े कारखाने का पता चला।

सुरक्षा बलों ने मौके से हथियार तराशने वाली लेथ मशीन से लेकर बिजली आपूर्ति के लिए इस्तेमाल होने वाले सोलर पैनल और जनरेटर तक बरामद किए हैं। जानकारों का मानना है कि इस फैक्ट्री के ध्वस्त होने से नक्सलियों की हथियार सप्लाई चेन को भारी नुकसान पहुंचा है।

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