414 करोड़ कस्टम्स फर्जीवाड़े मामले में आरोपी शंकर माली को हाईकोर्ट से जमानत

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जयपुर
414.09 करोड़ रुपये के कस्टम्स फर्जीवाड़े के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच ने आरोपी शंकर माली को जमानत दे दी है। शंकर माली पिछले करीब 11 महीने से जयपुर सेंट्रल जेल में बंद था। शुक्रवार को कोर्ट ने कुछ शर्तों के साथ उसकी जमानत मंजूर कर ली। मामले की सुनवाई न्यायाधीश विनोद कुमार भारवानी ने की। बता दें कि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेज देखने के बाद कोर्ट ने यह फैसला सुनाया।

पहले खारिज हुई थी जमानत
यह मामला अजमेर के रहने वाले जगदीश प्रसाद के बेटे शंकर माली और भारत सरकार के बीच चल रहा था। इससे पहले 8 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद आरोपी ने दोबारा जमानत के लिए याचिका लगाई। जानकारी के अनुसार, शंकर माली 1 अगस्त 2025 से न्यायिक हिरासत में था और तभी से जयपुर सेंट्रल जेल में बंद था।

कस्टम्स ने लगाए थे करोड़ों के फर्जी बिल के आरोप
कस्टम्स विभाग का आरोप है कि कस्टम्स विभाग का कहना है कि शंकर माली और उसके साथियों ने बेल स्टार टेक्नो सॉल्यूशंस ओपीसी प्रा. लि. और विजुअल बर्डस टेक्नोलॉजी के जरिए 414.09 करोड़ रुपये के सोने और हीरे के फर्जी बिल तैयार किए। विभाग का आरोप है कि इन बिलों के जरिए सीमा शुल्क चोरी की गई और हांगकांग, सिंगापुर तथा यूएई की फर्मों को गैरकानूनी तरीके से पैसे भेजे गए।

बचाव पक्ष और विभाग ने रखे अपने-अपने तर्क
आरोपी की ओर से मौजूद वकील अदालत में कहा कि शंकर माली निर्दोष है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है, पूरक चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है और पूरा मामला दस्तावेजों व इलेक्ट्रॉनिक सबूतों पर टिका है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले के दूसरे आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। वहीं कस्टम्स विभाग के वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि अगर आरोपी बाहर आया तो सबूतों पर असर पड़ सकता है और पहले ही मामले के कुछ अन्य आरोपी अभी भी कस्टम्स की पकड़ से बाहर हैं।

दोनों पक्षों की दलीलों के बाद हाईकोर्ट का फैसला
दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध दस्तावेजों पर विचार करने के बाद राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर बेंच ने शंकर माली की जमानत याचिका स्वीकार कर ली। न्यायालय ने कुछ शर्तों के साथ आरोपी को जमानत देने का आदेश जारी किया। यह आदेश न्यायाधीश विनोद कुमार भारवानी ने सुनाया।

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