छत्तीसगढ़ महिला कोष से मिले ऋण ने हरमनिया देवी की आजीविका को दी नई दिशा

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रायपुर

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और स्व-सहायता समूहों को आजीविका गतिविधियों से जोड़ने के लिए किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक असर ग्रामीण क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर मिल रहे हैं। छत्तीसगढ़ महिला कोष से प्राप्त ऋण ने अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत मेंड्राकला निवासी मती हरमनिया देवी राजवाड़े और उनके स्व-सहायता समूह को आजीविका का नया आधार दिया है।

हरमनिया देवी आकांक्षा स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष हैं। उन्होंने बताया कि समूह की महिलाओं के सामने नियमित आय का साधन विकसित करने की चुनौती थी। समूह की बैठकों में सदस्यों से चर्चा के बाद ऐसी गतिविधि शुरू करने का निर्णय लिया गया, जिससे महिलाओं को निरंतर आमदनी का अवसर मिल सके। इसी दौरान उन्हें छत्तीसगढ़ महिला कोष से ऋण प्राप्त करने की जानकारी मिली।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के सहयोग से मिली योजना की जानकारी

हरमनिया देवी ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने उन्हें छत्तीसगढ़ महिला कोष के माध्यम से मिलने वाले ऋण के बारे में जानकारी दी और आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित किया। इसके बाद उन्होंने समूह की अन्य सदस्यों से चर्चा कर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की और ऋण के लिए आवेदन किया।

आवेदन स्वीकृत होने के बाद आकांक्षा स्व-सहायता समूह को एक लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। समूह की महिलाओं ने आपसी सहमति से इस राशि का उपयोग ऐसी आजीविका गतिविधि में करने का निर्णय लिया, जिससे नियमित आमदनी सुनिश्चित हो सके।

किराना और सिंगार दुकान बनी आय का नया जरिया

समूह ने ऋण राशि से किराना एवं सिंगार सामग्री की दुकान शुरू की। ग्रामीण क्षेत्र में दैनिक उपयोग की वस्तुओं और सिंगार सामग्री की स्थानीय मांग को देखते हुए यह व्यवसाय समूह के लिए उपयोगी साबित हुआ। दुकान शुरू होने के बाद धीरे-धीरे ग्राहकों की संख्या बढ़ी और समूह की महिलाओं को नियमित आय का अवसर मिलने लगा।

हरमनिया देवी ने बताया कि पहले समूह की महिलाओं के पास स्थायी आजीविका गतिविधि का अभाव था। ऋण मिलने के बाद उन्हें सामूहिक रूप से व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिला। अब महिलाएं दुकान के संचालन में अपनी भूमिका निभाने के साथ मेहनत से आय अर्जित कर रही हैं। मांग के अनुसार दुकान में नई सामग्री भी जोड़ी जा रही है, जिससे कारोबार को आगे बढ़ाने की संभावनाएं बढ़ी हैं।

आमदनी बढ़ी तो बच्चों की पढ़ाई भी हुई आसान

हरमनिया देवी ने बताया कि आजीविका गतिविधि से होने वाली अतिरिक्त आमदनी का सकारात्मक असर परिवारों पर पड़ा है। आय में सुधार होने से बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, शैक्षणिक सामग्री और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सहूलियत हो रही है। पहले जिन छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, अब नियमित आमदनी के कारण उन्हें पूरा करना आसान हुआ है। उन्होंने कहा कि स्वरोजगार से समूह की महिलाओं में आत्मविश्वास भी बढ़ा है। महिलाएं अब परिवार की आर्थिक जरूरतों में पहले की तुलना में अधिक योगदान दे पा रही हैं। समूह के माध्यम से सामूहिक निर्णय लेकर आर्थिक गतिविधि संचालित करने से उनमें नेतृत्व क्षमता और आत्मनिर्भरता की भावना भी मजबूत हुई है।

“ऋण ने हमें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया”

हरमनिया देवी राजवाड़े ने कहा कि छत्तीसगढ़ महिला कोष से मिले ऋण ने उनके समूह को केवल पूंजी ही नहीं दी, बल्कि अपने स्तर पर व्यवसाय शुरू करने और आगे बढ़ने का अवसर भी दिया। उन्होंने कहा, “एक लाख रुपये की ऋण सहायता से शुरू की गई किराना और सिंगार दुकान आज हमारे समूह की आजीविका का आधार बन रही है। इससे महिलाओं को नियमित आमदनी का अवसर मिला है और परिवारों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हो रहा है।”

उन्होंने छत्तीसगढ़ शासन, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्व-सहायता समूहों को ऋण और आजीविका गतिविधियों से जोड़ने की पहल ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसी योजनाओं से महिलाओं को अपने पैरों पर खड़े होने, परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।

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