यूपीवासियों को मिलेगा बड़ा फायदा, सरकार की नई व्यवस्था से संपत्ति का बंटवारा हुआ आसान
लखनऊ
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेशवासियों को नए साल का बड़ा तोहफा देते हुए पारिवारिक संपत्तियों के हस्तांतरण की प्रक्रिया को बेहद आसान और सस्ता बना दिया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियां भी दायरे में
अब तक केवल आवासीय और कृषि संपत्तियों के पारिवारिक दान विलेख (गिफ्ट डीड) पर ही स्टांप ड्यूटी में छूट मिलती थी। नई व्यवस्था के तहत अब व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों को भी इस दायरे में शामिल कर लिया गया है। अब परिवार के सदस्यों के बीच किसी भी प्रकार की अचल संपत्ति दान करने पर भारी-भरकम स्टांप शुल्क के बजाय मात्र 5,000 रुपये की स्टांप ड्यूटी देनी होगी। इसके साथ ही संपत्ति के कुल मूल्य का 1 प्रतिशत निबंधन (Registration) शुल्क देय होगा।
किसे मिलेगा इसका लाभ?
इस छूट का लाभ परिवार के रक्त संबंधियों जैसे- माता, पिता, पति, पत्नी, पुत्र, पुत्री, पुत्रवधु, दामाद, भाई, बहन और पोते-पोतियों को मिलेगा। विशेष बात यह है कि सगे भाई की मृत्यु होने पर उनकी पत्नी (भाभी) को भी अब इस छूट का पात्र माना गया है।
अनावश्यक विवादों और मुकदमों से मिलेगी मुक्ति
स्टांप एवं पंजीयन मंत्री रवीन्द्र जायसवाल ने बताया कि पहले व्यावसायिक संपत्तियों पर सर्किल रेट का 5 से 7 प्रतिशत स्टांप शुल्क देना पड़ता था, जिससे लोग कानूनी हस्तांतरण से बचते थे। इस ऐतिहासिक निर्णय से वैधानिक हस्तांतरण बढ़ेगा, जिससे पारिवारिक विवादों और लंबी मुकदमेबाजी में कमी आएगी। साथ ही, विभाग की राजस्व व्यवस्था में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
मात्र ₹5,000 होगी स्टांप ड्यूटी
अब अगर कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति परिवार के सदस्य को Gift Deed (दान विलेख) के जरिए देता है, तो उसे केवल ₹5,000 की स्टांप ड्यूटी देनी होगी। पहले यह छूट सिर्फ आवासीय और कृषि संपत्ति तक सीमित थी, लेकिन अब कमर्शियल प्रॉपर्टी और इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी पर भी यही नियम लागू होगा। इससे शहरों में दुकान, गोदाम, फैक्ट्री जैसी संपत्तियों के बंटवारे पर भारी टैक्स नहीं देना पड़ेगा। यह फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया।
सरकार ने स्टाम्प और पंजीकरण विभाग के उस प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिसके तहत परिवार के सदस्यों के बीच अचल संपत्ति के दान पर भारी शुल्क खत्म कर दिया गया है। अब किसी भी प्रकार की संपत्ति के ट्रांसफर पर केवल नाममात्र की राशि में रजिस्ट्री हो सकेगी। नई व्यवस्था के अनुसार, परिवार के भीतर संपत्ति के दान पर ₹5,000 स्टांप ड्यूटी और संपत्ति मूल्य का केवल 1 प्रतिशत रजिस्ट्रेशन शुल्क देनी होगी। इससे पहले शहरी क्षेत्रों में व्यावसायिक संपत्ति पर 7 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 5 प्रतिशत तक शुल्क देना पड़ता था, जो आम लोगों के लिए काफी महंगा था। यही कारण था कि लोग कानूनी प्रक्रिया से बचते थे और बाद में विवाद खड़े हो जाते थे।
पारिवारिक सदस्यों को मिलेगा लाभ, किराया रजिस्ट्रेशन भी हुआ सस्ता
इस नई छूट का फायदा पुत्र, पुत्री, माता, पिता, पति, पत्नी, भाई, बहन, पुत्रवधु, दामाद, नाती-नातिन, भतीजा-भतीजी सहित कई रिश्तों को मिलेगा। खास बात यह है कि अब सगे भाई के निधन की स्थिति में उसकी पत्नी को भी इस छूट का लाभ मिलेगा। यानी अधिकतर नजदीकी रिश्तों में संपत्ति ट्रांसफर बेहद आसान हो जाएगा। योगी सरकार ने सिर्फ संपत्ति बंटवारे ही नहीं, बल्कि किराया समझौते के रजिस्ट्रेशन को भी बेहद सस्ता बना दिया है।
अब किराए के समझौते पर लगने वाली स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क में 90 प्रतिशत तक की कटौती की गई है। पहले अधिक शुल्क के कारण लोग रेंट एग्रीमेंट रजिस्टर्ड नहीं कराते थे, जिससे बाद में मकान मालिक और किरायेदार के बीच विवाद होते थे। नई व्यवस्था में किराया अवधि और वार्षिक किराए के आधार पर बहुत कम शुल्क तय किया गया है। इससे अब आम नागरिक बिना डर के अपना किराया समझौता कानूनी रूप से पंजीकृत करा सकेगा। इससे न केवल कानूनी सुरक्षा मिलेगी, बल्कि भविष्य के झगड़ों से भी बचाव होगा।
पैतृक संपत्ति का बंटवारा अब सिर्फ 10 हजार में
योगी सरकार के एक और फैसले के तहत अब पैतृक संपत्ति के बंटवारे की रजिस्ट्री मात्र ₹10,000 में कराई जा सकेगी। पहले इस प्रक्रिया में हजारों से लेकर लाखों रुपये तक खर्च हो जाते थे। अब कम खर्च में कानूनी बंटवारा संभव होगा, जिससे पारिवारिक विवादों में भारी कमी आएगी। इन सभी सुधारों से उत्तर प्रदेश में कानूनी पारदर्शिता और संपत्ति से जुड़े मामलों में भरोसा बढ़ेगा। लोग बिना डर और भारी खर्च के अपनी संपत्ति को सही तरीके से ट्रांसफर कर पाएंगे। सरकार का लक्ष्य कम खर्च, कम विवाद और ज्यादा पारदर्शिता है।
योगी सरकार का यह फैसला न केवल आम नागरिकों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि उत्तर प्रदेश में संपत्ति व्यवस्था को आधुनिक और भरोसेमंद बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम भी है। बता दें कि वर्ष 2022 तक पारिवारिक दान पर पूरी स्टांप ड्यूटी देनी होती थी। 2023 में पहली बार आवासीय और कृषि संपत्तियों पर राहत दी गई थी। अब सरकार ने यह छूट कमर्शियल और इंडस्ट्रीयल प्रॉपर्टी तक बढ़ा दी है। इससे उत्तर प्रदेश में संपत्ति के पंजीकरण को बढ़ावा मिलेगा और अवैध या कच्चे दस्तावेजों की संख्या कम होगी।
सरकार का मानना है कि इस फैसले से संपत्ति से जुड़े विवाद, कोर्ट केस और पारिवारिक झगड़े काफी हद तक कम होंगे। जब संपत्ति का हस्तांतरण आसान और सस्ता होगा, तो लोग कानूनी रास्ता अपनाएंगे। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि राजस्व व्यवस्था में भी सुधार होगा। सरकार जल्द ही इस संबंध में अधिसूचना जारी करेगी, जिसके बाद यह सुविधा पूरे प्रदेश में लागू हो जाएगी।
