भारत में रहकर दुश्मन देश के लिए जासूसी करने वाले के साथ होता है यह सलूक

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नई दिल्ली 
हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके बाद भारतीय सेना के 'ऑपरेशन सिंदूर' ने आतंकवादियों के हौसले पस्त कर दिए थे। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच भारत सरकार देश में आतंक फैलाने वाले और घुसपैठियों पर कड़ी नज़र बनाए हुए है। इसी क्रम में भारत में कई ऐसे सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर और एक सीआरपीएफ जवान को गिरफ्तार किया गया है जो भारत में रहकर पाकिस्तान के लिए जासूसी कर रहे थे। ऐसे में सवाल उठता है कि भारतीय सेना में गद्दारी करने पर कितनी कड़ी सजा मिलती है?

सेना में गद्दारी का मतलब क्या है?
सेना में गद्दारी का सीधा अर्थ है राष्ट्र के प्रति अपनी निष्ठा का उल्लंघन करना। यह तब होता है जब कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी दुश्मन देश की चुपके से मदद करता है या राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़ी कोई गोपनीय जानकारी लीक करता है। देश के साथ गद्दारी करना पूरे राष्ट्र की सुरक्षा पर एक गंभीर खतरा माना जाता है। भारतीय कानून व्यवस्था में ऐसे गद्दार को एक गंभीर अपराधी माना गया है और इसके लिए कठोरतम दंड का प्रावधान है।

गद्दारी करने पर क्या मिलती है सजा?
 भारतीय सेना में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहाँ कुछ लोग सेना में रहते हुए दुश्मनों के लिए काम कर रहे थे। ऐसे मामलों में सजा की प्रक्रिया कई चरणों में होती है:

➤ कोर्ट ऑफ इंक्वायरी: सबसे पहले यदि किसी सैनिक पर गद्दारी का आरोप लगता है तो कोर्ट ऑफ इंक्वायरी के लिए एक जांच टीम गठित की जाती है। इसमें बयान दर्ज किए जाते हैं और एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाती है। हालांकि इस चरण में कोई सजा नहीं दी जाती है।

➤ कोर्ट मार्शल: इस रिपोर्ट के आधार पर उस जवान के खिलाफ कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया शुरू होती है। इसमें संबंधित कमांडिंग ऑफिसर चार्जशीट तैयार करते हैं जिसके बाद जनरल कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया शुरू होती है। इस चरण में भी सजा का ऐलान नहीं होता है।

➤ सजा का ऐलान: अंत में संबंधित कमांड को सजा के लिए प्रस्ताव भेजा जाता है और फिर उस सैनिक के खिलाफ सजा का ऐलान किया जाता है। सेना में गद्दारी के मामलों में आजीवन कारावास से लेकर मौत की सजा तक दी जा सकती है।

गद्दारी के बाद क्या-क्या चीजें नहीं मिलतीं?
एक बार जब कोई सैनिक सेना में गद्दारी करते हुए पकड़ा जाता है और दोषी पाया जाता है तो उसके कई अधिकार और सुविधाएं छीन ली जाती हैं:

➤ निष्कासन: दोषी सैनिक को तत्काल सेना से निष्कासित कर दिया जाता है जिससे उसकी सेवा समाप्त हो जाती है।
➤ लाभों से वंचित: सेवा समाप्त होने के बाद उसे भविष्य में मिलने वाले सभी लाभों से वंचित कर दिया जाता है जिनमें पेंशन, कैंटीन सुविधाएं और भूतपूर्व सैनिक को मिलने वाले अन्य लाभ शामिल हैं।
➤ रैंक में गिरावट: यदि किसी कारणवश सेवा समाप्त नहीं होती है तो सैनिक की रैंक घटा दी जाती है और उसे अपनी रैंक से नीचे की रैंक पर भेजा जा सकता है।

 

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