यूजीसी एक्ट के समर्थन में फिर गरमाया माहौल, इस जिले में सड़कों पर उतरे लोग

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महाराजगंज
आज महाराजगंज में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ। अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के शिक्षकों-छात्रों से जुड़े भेदभाव निरोधक प्रावधानों पर लगी रोक के विरोध में भारतीय बौद्ध महासभा व एससी, एसटी, ओबीसी संयुक्त मोर्चा के बैनर तले लोगों ने जवाहरलाल नेहरू स्मारक पीजी कॉलेज से प्रदर्शन शुरू किया।

यूजीसी एक्ट के समर्थन और विरोध में प्रदर्शनों का दौर थम नहीं रहा है। एक्ट के समर्थन और उच्च शिक्षा में समान अवसर और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने की मांग को लेकर सोमवार को यूपी के महाराजगंज की सड़कों पर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ। अनुसूचित जाति, जनजाति व पिछड़ा वर्ग के शिक्षकों-छात्रों से जुड़े भेदभाव निरोधक प्रावधानों पर लगी रोक के विरोध में भारतीय बौद्ध महासभा व एससी, एसटी, ओबीसी संयुक्त मोर्चा के बैनर तले सैकड़ों लोगों ने जवाहरलाल नेहरू स्मारक पीजी कॉलेज के खेल मैदान से नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन शुरू किया। जुलूस की शक्ल में जिला मुख्यालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति को संबोधित छह सूत्रीय मांग पत्र प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा और तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। इसका नेतृत्व भारतीय बौद्ध महासभा के जिलाध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह व प्रांतीय महासचिव श्रवण कुमार पटेल ने किया।

जिलाध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि यूजीसी एक्ट का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति, धर्म, लिंग, जन्मस्थान व दिव्यांगता के आधार पर होने वाले भेदभाव पर सख्त रोक लगाना था। उनका आरोप था कि संबंधित प्रावधानों के खिलाफ दायर याचिकाओं की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में प्रभावी पैरवी नहीं की, जिसके चलते आदेश पर स्थगन लग गया। प्रांतीय महासचिव श्रवण पटेल ने कहा कि यूजीसी की रिपोर्टों में दलित-पिछड़े वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव की घटनाओं में वृद्धि दर्ज है और उन्होंने आरोप लगाया कि उत्पीड़न व मानसिक दबाव के कारण कई छात्र आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर हुए हैं।

संयुक्त मोर्चा ने मांग की कि सरकार तत्काल हस्तक्षेप कर स्थगन हटवाए और पूर्व व्यवस्था बहाल कराए, जिससे विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में पारदर्शी, जवाबदेह व भेदभाव-मुक्त शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित किया जा सके। इस दौरान शिवमंगल गौतम, अरविन्द प्रताप निषाद, रामचंद्र बौद्ध, वकील प्रजापति, रामसमुझ मौर्या, डॉ. एलबी प्रसाद, हरिश्चन्द्र बौद्ध, बाल गोपाल, बैजनाथ बौद्ध, पदमाकर बौद्ध, प्रदीप कुमार गौतम, सुधाकर भारती, सतीश चन्द, नागेंद्र बौद्ध, सूर्यमनि प्रसाद, चन्द्रबली, अतुल, अमरनाथ यादव, मदन मोहन साहनी, शैलेश मौर्या सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

 

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