‘मेरे ब्रेस्ट की वजह से मिला अमेरिका का O-1B वीजा’, इंफ्लुएंसर का बयान क्यों है चर्चा में?

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ओटावा

डिजिटल दौर में टैलेंट की परिभाषा अब तेजी से बदल रही है. जो पहचान कभी मंच, स्टूडियो या खेल के मैदान से बनती थी, आज वही ताकत सोशल मीडिया, व्यूज और फॉलोअर्स में नजर आती है. ऐसी ही एक चौंकाने वाली कहानी सामने आयी है. दरअसल, कनाडा की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर जूलिया ऐन की, जिन्होंने अपने ऑनलाइन कंटेंट और डिजिटल लोकप्रियता के दम पर अमेरिका का बेहद प्रतिष्ठित O-1B वीजा हासिल कर लिया. जूलिया ऐन ने खुद अपनी पोस्ट में बताया कि 'मेरे ब्रेस्ट की वजह से मुझे अमेरिका का O-1B वीजा मिला. यह मामला न सिर्फ सोशल मीडिया की ताकत दिखाता है, बल्कि अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम के बदलते चेहरे को भी उजागर करता है. तो चलिए जानते हैं क्या है मामला. 

वीडियो ही बने सबूत
कनाडा की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर जूलिया ऐन उस समय सुर्खियों में आ गईं, जब उन्होंने ‘असाधारण प्रतिभा (extraordinary ability) वाले कलाकारों को दिए जाने वाले अमेरिका के प्रतिष्ठित O-1B वीजा को हासिल कर लिया. इस मामले की सबसे खास बात यह रही कि जूलिया ऐन ने अपने वीजा आवेदन में पारंपरिक उपलब्धियों की बजाय अपने सोशल मीडिया कंटेंट और लोकप्रियता को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत के तौर पर पेश किया. 25 साल की जूलिया ने आवेदन के साथ ऐसे वीडियो जमा किए, जिनमें वह लो-कट शर्ट में नजर आती हैं और एक वीडियो में सैंडविच खाते हुए मजाकिया अंदाज में सवाल पूछती दिखती हैं. 

जूलिया ने खुद स्वीकार किया कि यही वीडियो अमेरिकी सरकार को भेजे गए थे. टाइम्स ऑफ लंदन से बातचीत में उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा- 'शायद मेरी असाधारण प्रतिभा यही है कि मेरे ब्रेस्ट बड़े हैं.' उनका आवेदन स्वीकार कर लिया गया और वह साल 2024 में O-1B वीजा पाने वाले करीब 20,000 लोगों में शामिल हो गईं.

O-1B वीजा का इतिहास
O-1B वीजा को अमेरिका का बेहद खास वीजा माना जाता है. इसकी शुरुआत साल 1972 में हुई थी, जब मशहूर सिंगर जॉन लेनन को अमेरिका में रहने की अनुमति देने के लिए इसका इस्तेमाल किया गया. बाद में 1990 में इसे आधिकारिक रूप से ‘कला के क्षेत्र में असाधारण क्षमता’ रखने वाले विदेशी नागरिकों के लिए लागू किया गया. बीते 10 वर्षों में इस वीजा को पाने वालों की प्रोफाइल में बड़ा बदलाव आया है. जहां पहले बड़े कलाकार, सिंगर और सांस्कृतिक हस्तियां इसके लिए आवेदन करती थीं, वहीं अब सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, ई-स्पोर्ट्स खिलाड़ी और OnlyFans जैसे प्लेटफॉर्म्स से जुड़े कंटेंट क्रिएटर्स की संख्या तेजी से बढ़ी है.

इमिग्रेशन वकीलों की राय
प्रसिद्ध इमिग्रेशन वकील माइकल वाइल्ड्स के मुताबिक, यह बदलाव समय के साथ आया है. उन्होंने बताया कि पहले उनके पास सिनेड़ ओ’कॉनर और बॉय जॉर्ज जैसे बड़े कलाकारों के केस आते थे, लेकिन अब इन्फ्लुएंसर और डिजिटल क्रिएटर्स भी बड़ी संख्या में O-1B वीजा के लिए आवेदन कर रहे हैं. हालांकि, सिर्फ शारीरिक बनावट या बोल्ड वीडियो होना ही O-1B वीजा पाने के लिए काफी नहीं है. अमेरिकी इमिग्रेशन नियमों के अनुसार, आवेदक को यह साबित करना होता है कि वह अपने क्षेत्र में अलग और खास है. इसके लिए राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय पहचान, बड़ी फैन फॉलोइंग, अच्छी कमाई, व्यावसायिक सफलता और सोशल मीडिया पर मजबूत प्रभाव जैसे सबूत देने होते हैं.

आंकड़ों से साबित हुई लोकप्रियता
जूलिया ऐन ने अपने आवेदन में करीब दो दर्जन वीडियो, फॉलोअर्स की संख्या, आय से जुड़े दस्तावेज और जिन ब्रांड्स व प्लेटफार्म के साथ उन्होंने काम किया था, उनके एप्लीकेशन जमा किए. उनके एक वीडियो को 1.1 करोड़ से ज्यादा बार देखा जा चुका है, जिस पर लाखों लाइक और हजारों कमेंट्स हैं. जूलिया ने यह भी बताया कि वह न्यूयॉर्क में रहना चाहती थीं, क्योंकि यह यहूदी कल्चर का बड़ा केंद्र है. उनका कहना है कि उनका मजाकिया कंटेंट दुनिया में बढ़ती नफरत के माहौल के बीच लोगों को हल्के पल देने का काम करता है.

डिजिटल क्रिएटर्स भी अर्थव्यवस्था का हिस्सा
इमिग्रेशन वकीलों का मानना है कि जूलिया जैसी कंटेंट क्रिएटर्स को मज़ाक में नहीं लिया जाना चाहिए. वे अमेरिकी अर्थव्यवस्था में पैसा ला रही हैं और डिजिटल एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री को आगे बढ़ा रही हैं. O-1B और O-1A जैसे वीजा आमतौर पर तीन साल के लिए दिए जाते हैं और बाद में इन्हें रिन्यू कराया जाता है.

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