पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का 71 वर्ष की आयु में निधन, ममता बनर्जी के साथ मिलकर की थी TMC की स्थापना

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कोलकाता
पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री और कभी तृणमूल कांग्रेस में ममता बनर्जी के बाद नंबर दो नेता माने जाने वाले मुकुल रॉय का सोमवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. 71 वर्षीय रॉय को कोलकाता के सॉल्ट लेक स्थित अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां तड़के करीब 1.30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली. उनके बेटे सुभ्रांशु रॉय ने उनके निधन की पुष्टि की है. उन्होंने कहा, 'कल रात कार्डियक अरेस्ट से उनकी मौत हो गई. वह पिछले 600 दिनों से अस्पताल में भर्ती थे. यह मेरे और मेरे परिवार के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है.' 

मुकुल रॉय का जन्म उत्तर 24 परगना के कांचरापाड़ा में 14 मई 1954 को हुआ था. वह राजनीति में आने से पहले वे ट्रेड यूनियन की गतिविधियों से जुड़े रहे. उन्होंने कलकत्ता विश्वविद्यालय से साइंस में बैचलर डिग्री प्राप्त की थी और साल 2006 में मदुरै के कामराज विश्वविद्यालय से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में एमए की डिग्री ली थी. जनवरी 1998 में अस्तित्व में आई तृणमूल कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे मुकुल रॉय, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी भी रहे.

यूथ कांग्रेस से शुरू की राजनीतिक पारी

ममता बनर्जी की तरह ही मुकुल रॉय ने भी बंगाल में यूथ कांग्रेस से अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी. तृणमूल कांग्रेस की स्थापना के बाद उन्होंने पार्टी में ममता बनर्जी के साथ मिलकर काम किया और उन्हें पार्टी का महासचिव बनाया गया. इसके बाद रॉय दिल्ली में पार्टी का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे. वह 2006 में राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए और 2009 से 2012 तक राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता के रूप में उन्होंने जिम्मेदारी निभाई.

TMC को मजबूत करने में अहम भूमिका
यूपीए‑II सरकार में मुकुल रॉय ने पहले शिपिंग मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में काम किया. इसके बाद मार्च 2012 में उन्होंने पार्टी के सहयोगी दिनेश त्रिवेदी की जगह रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली. वह बंगाल व दिल्ली दोनों जगह पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार रहे. 2011 के बाद, जब तृणमूल कांग्रेस ने 34 वर्षों के वाम शासन का अंत किया और ममता बनर्जी बंगाल की मुख्यमंत्री बनीं, तब पार्टी को मजबूत करने में मुकुल रॉय की अहम भूमिका रही. मुकुल रॉय 2015 तक तृणमूल कांग्रेस  के महासचिव रहे. उनके कार्यकाल में सीपीआई(एम) और कांग्रेस से कई बड़े नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा.

मुकुल रॉय थोड़े समय के लिए BJP में रहे
मुकुल रॉय ने तृणमूल कांग्रेस से दूरी बनाते हुए नवंबर 2017 में औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया. उन्होंने जमीनी स्तर पर काम करते हुए राज्य में भाजपा का आधार मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई और 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी ने राज्य में 18 सीटें जीतीं. रॉय ने तृणमूल कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं को भाजपा में शामिल कराने में मदद की और 2021 के विधानसभा चुनाव में कृष्णानगर उत्तर से भाजपा विधायक चुने गए.

कलकत्ता हाई कोर्ट ने रद्द की थी विधायकी
हालांकि जल्द ही भाजपा से भी उनकी दूरी बढ़ने लगी और अंततः जून 2021 में वह वापस तृणमूल कांग्रेस में लौट आए. लेकिन तृणमूल में वापसी के बाद वह पार्टी में न तो पहले जैसी राजनीतिक हैसियत में दिखे और न ही राजनीतिक रूप से सक्रिय रहे. मुकुल रॉय डिमेंशिया समेत कई अन्य बीमारियों से भी पीड़ित थे. 13 नवंबर 2025 को कलकत्ता हाई कोर्ट ने 2021 के चुनाव में भाजपा के टिकट पर निर्वाचित होने के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के मामले में दलबदल कानून के तहत उनको विधायक पद से अयोग्य घोषित कर दिया था.

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