जिंदा को मृत बताने के मामले में EC का बयान: ‘कुछ गलतियां हो जाती हैं’

Share on Social Media

नई दिल्ली 
बिहार में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के खिलाफ दायर अर्जियों पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई शुरू हुई। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस न्यायमूर्ति जे. बागची की पीठ ने आरजेडी नेता मनोज झा की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल को सुना। इस दौरान कपिल सिब्बल ने दावा किया कि एक निर्वाचन क्षेत्र में ही ऐसे 12 लोगों के मृत होने का किया गया है, जो जीवित पाए गए हैं। वहीं एक अन्य घटना में भी जीवित व्यक्ति को मृत घोषित कर दिया गया है। इस पर निर्वाचन आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि इस तरह की प्रक्रिया में ‘कहीं कहीं कुछ त्रुटियां होना स्वाभाविक है’।

उन्होंने यह भी कहा कि मृत व्यक्तियों को जीवित और जीवित को मृत घोषित करने जैसी गलतियों को दूर किया जा सकता है क्योंकि यह एक ड्राफ्ट लिस्ट है। पीठ ने निर्वाचन आयोग से कहा कि वह तथ्यों और आंकड़ों के साथ ‘तैयार’ रहे क्योंकि प्रक्रिया शुरू होने से पहले की मतदाताओं की संख्या, पहले के मृतकों की संख्या और अब की संख्या तथा अन्य प्रासंगिक विवरणों पर सवाल उठेंगे। निर्वाचन आयोग को एक संवैधानिक प्राधिकरण करार देते हुए 29 जुलाई को शीर्ष अदालत ने कहा था कि अगर बिहार में मतदाता सूची की एसआईआर में ‘बड़े पैमाने पर मतदाताओं को हटाया गया है’ तो वह तुरंत हस्तक्षेप करेगी।

बिहार में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट एक अगस्त को प्रकाशित की गई थी और अंतिम मतदाता सूची 30 सितंबर को प्रकाशित होने वाली है, जबकि विपक्ष का दावा है कि यह प्रक्रिया करोड़ों पात्र नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित कर देगी। शीर्ष अदालत ने 10 जुलाई को निर्वाचन आयोग से आधार, मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड को वैध दस्तावेज मानने को कहा था और निर्वाचन आयोग को बिहार में अपनी प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति दी थी। चुनाव आयोग के हलफनामे में SIR को यह कहते हुए उचित ठहराया गया है कि यह मतदाता सूची से ‘अयोग्य व्यक्तियों को हटाकर’ चुनाव की शुचिता को बढ़ाता है।

राजद सांसद झा और तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा के अलावा, कांग्रेस के के. सी. वेणुगोपाल, शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा-एसपी) से सुप्रिया सुले, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से डी. राजा, समाजवादी पार्टी (सपा) से हरेंद्र सिंह मलिक, शिवसेना (उद्धव बालासाहब ठाकरे) से अरविंद सावंत, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) से सरफराज अहमद और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी लेनिनवादी) के दीपांकर भट्टाचार्य ने संयुक्त रूप से निर्वाचन आयोग के 24 जून के फैसले को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का रुख किया है। इसके अलावा योगेंद्र यादव जैसे कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का रुख किया है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *