कृषि अपशिष्ट बनेगा देश की ताकत, उपयोगी संसाधन में बदलने की जरूरत: नितिन गडकरी

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नई दिल्ली
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि खेतों में बचने वाले कृषि अपशिष्ट को देश का एक उपयोगी राष्ट्रीय संसाधन बनाया जा सकता है। उन्होंने यह बात बुधवार को वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) के 'टेक्नोलॉजी ट्रांसफर सेरेमनी' में कही। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि बायो-बिटुमेन बनाना 'विकसित भारत 2047' के सपने को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। खेती से निकलने वाले कचरे का उपयोग करने से खेतों में पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण कम होगा और पुनः उपयोग वाली अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि यदि सड़कों में 15 प्रतिशत बायो-बिटुमेन मिलाया जाए, तो भारत को करीब 4,500 करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है। इससे देश की आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता भी कम होगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज भारत ने सड़क निर्माण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त की है। देश दुनिया का पहला देश बन गया है जिसने बायो-बिटुमेन का व्यावसायिक उत्पादन शुरू किया है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद के वैज्ञानिकों को बधाई दी और सहयोग के लिए राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह का धन्यवाद किया।
गडकरी ने कहा कि यह नई तकनीक किसानों को सशक्त बनाएगी, गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी।
उन्होंने बताया कि चावल की पराली से बने जैव बिटुमेन का सफल परीक्षण किया गया है, जो पेट्रोल से बने बिटुमेन से बेहतर साबित हुआ है। इससे पराली जलाने की समस्या भी कम होगी।
अब समय आ गया है कि कृषि अपशिष्ट, फसल अवशेष, बांस और जैव पदार्थों को हरित ईंधन और उपयोगी उत्पादों में बदला जाए। पिछले साल एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि भारत को हर साल 22 लाख करोड़ रुपए का जीवाश्म ईंधन आयात करना पड़ता है। पराली जलाने और वाहनों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण बढ़ा रहा है, इसलिए भारत को ऊर्जा आयातक से ऊर्जा निर्यातक देश बनना चाहिए।
इंडियन बायोगैस एसोसिएशन (आईबीए) द्वारा हाल ही में जारी एक बयान के अनुसार, किसानों द्वारा हर साल 73 लाख टन धान की पराली जलाई जाती है। अगर इसे संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) और बायोएथेनॉल में बदला जाए, तो देश को 1,600 करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा की बचत हो सकती है और प्रदूषण भी कम होगा। बयान में आगे कहा गया है कि इस नीति से देश में करीब 37,500 करोड़ रुपए का निवेश आने की उम्मीद है और 2028-29 तक 750 सीबीजी परियोजनाएं शुरू हो सकती हैं।

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