78 पार्षदों के बहुमत के बाद BJP में मेयर की कुर्सी पर मंथन, ये 5 दावेदार सबसे मजबूत

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जयपुर
जयपुर नगर निगम चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद अब गुलाबी नगरी की सियासत का केंद्र मेयर की कुर्सी बन गया है। 150 वार्डों वाली जयपुर नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 78 सीटों पर शानदार जीत हासिल करते हुए स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। बहुमत का आंकड़ा 76 का था, जिसे पार करते ही भाजपा के खेमे में जश्न का माहौल है। वहीं कांग्रेस को इस चुनाव में 53 सीटों से ही संतोष करना पड़ा है और 15 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत का परचम लहराया है। बहुमत हासिल करने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी के अंदर नए मेयर के नाम को लेकर बैठकों और राजनीतिक लामबंदी का दौर बेहद तेज हो गया है।

राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार 21 सितंबर 2026 को मेयर पद के लिए अप्रत्यक्ष मतदान होगा, लेकिन उससे पहले शहर के सियासी गलियारों में 5 प्रमुख नामों की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है।

जयपुर नगर निगम की मेयर सीट इस बार अनारक्षित श्रेणी में है, जिसका मतलब है कि किसी विशेष वर्ग या जाति का कानूनी बंधन नहीं है। यही वजह है कि संगठन में मजबूत पैठ रखने वाले अनुभवी नेताओं से लेकर संघ पृष्ठभूमि के दिग्गजों तक का दावा काफी मजबूत माना जा रहा है।

सुनील कोठारी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से सीधे जुड़े सुनील कोठारी को इस समय पार्टी का सबसे प्रबल और फ्रंटरनर दावेदार माना जा रहा है। संगठन के प्रति उनकी निष्ठा, बेदाग छवि और निर्विवाद व्यक्तित्व के कारण पार्टी आलाकमान किसी भी प्रकार की आंतरिक गुटबाजी को रोकने के लिए उनके नाम पर अंतिम मुहर लगा सकता है।

पुनीत कर्णावत
मेयर पद की इस दौड़ में दूसरा सबसे बड़ा और स्वाभाविक नाम निवर्तमान डिप्टी मेयर पुनीत कर्णावत का है। कर्णावत ने वार्ड 76 से एक बार फिर शानदार जीत दर्ज की है। उनके पास नगर निगम के प्रशासनिक तंत्र और शहर के विकास कार्यों को संचालित करने का पुराना और व्यावहारिक अनुभव मौजूद है।

यदि प्रदेश नेतृत्व अनुभव और शहर के पुराने सियासी समीकरणों को प्राथमिकता देता है तो पुनीत कर्णावत का पलड़ा काफी भारी हो सकता है।

विमल अग्रवाल
तीसरे नंबर पर वरिष्ठ भाजपा नेता विमल अग्रवाल हैं, जिन्होंने वार्ड 135 से 7,115 वोटों के रिकॉर्ड मार्जिन से जीत हासिल की है। जयपुर के व्यापारिक और वैश्य समुदाय में उनकी गहरी पकड़ है, जिसके चलते उनका दावा भी काफी मजबूत बनकर उभरा है।

शैलेंद्र भार्गव
चौथे दावेदार के रूप में पूर्व शहर अध्यक्ष शैलेंद्र भार्गव का नाम चर्चा में है, जिन्होंने वार्ड 43 से कड़े मुकाबले में जीत हासिल की है। संगठन में लंबे समय तक काम करने का उनका अनुभव और पार्टी नेतृत्व के साथ बेहतर तालमेल उनके पक्ष में जाता है।

सरप्राइज चेहरा
पांचवें विकल्प के रूप में पार्टी किसी सरप्राइज महिला चेहरे को भी आगे कर सकती है। हालांकि जयपुर की पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल चुनाव हारकर इस रेस से बाहर हो चुकी हैं, लेकिन यदि पार्टी आलाकमान किसी युवा या वरिष्ठ महिला पार्षद को मौका देकर चौंकाना चाहे तो किसी वरिष्ठ महिला पार्षद के नाम पर विचार किया जा सकता है।

किसे और क्यों मिल सकती है तरजीह?
जयपुर का मेयर कौन बनेगा, इसका अंतिम फैसला भारतीय जनता पार्टी का केंद्रीय और प्रादेशिक नेतृत्व पार्षदों के रुख को ध्यान में रखकर करेगा। जयपुर में भाजपा की राजनीति में हमेशा से संगठन और संघ लॉबी का बड़ा प्रभाव रहा है। सुनील कोठारी को संघ का समर्थन प्राप्त होने के कारण उनकी दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही है।

वहीं मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार शहर के विकास कार्यों को गति देने के लिए प्रशासनिक रूप से सक्षम और अनुभवी चेहरे के रूप में पुनीत कर्णावत पर भी दांव लगा सकती है।

दूसरी ओर वैश्य और व्यापारी वोट बैंक जयपुर में भाजपा की रीढ़ माना जाता है। इस वर्ग को साधे रखने के लिए रिकॉर्ड वोटों से जीतने वाले विमल अग्रवाल का नाम भी प्रमुखता से विचारधीन है।

फिलहाल सभी 78 निर्वाचित भाजपा पार्षदों को एकजुट रखने और किसी भी प्रकार की क्रॉस वोटिंग को रोकने के लिए पार्टी ने अपनी रणनीति तैयार कर ली है। 21 सितंबर को होने वाली वोटिंग के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि जयपुर की कमान अगले पांच सालों के लिए किस दिग्गज के हाथों में सौंपी जाती है।

जयपुर में कैसे होगा मेयर का चुनाव?
राजस्थान में आम जनता सीधे तौर पर मेयर का चुनाव नहीं करती है। यहां नगर निगम के निर्वाचित पार्षद ही अपने मताधिकार का प्रयोग करके मेयर का चुनाव करते हैं। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से तय कार्यक्रम के अनुसार यह पूरी अप्रत्यक्ष चुनाव प्रक्रिया इस प्रकार संचालित होगी:

अधिसूचना और नामांकन (15-16 सितंबर): निर्वाचन आयोग द्वारा 15 सितंबर को चुनाव की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। मेयर पद के लिए उम्मीदवारी पेश करने वाले प्रत्याशी 16 सितंबर तक अपना नामांकन पत्र दाखिल कर सकते हैं।

नामांकन पत्रों की जांच और वापसी (18 सितंबर): 17 सितंबर को नामांकन पत्रों की संवीक्षा होगी और 18 सितंबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। इसके तुरंत बाद चुनाव मैदान में डटे अंतिम उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी जाएगी।

पार्षदों की वोटिंग (21 सितंबर): मेयर पद के लिए मुख्य मतदान 21 सितंबर 2026 को आयोजित होगा। इस दिन नगर निगम मुख्यालय पर रिटर्निंग ऑफिसर की देखरेख में सभी 150 निर्वाचित पार्षदों की विशेष बैठक बुलाई जाएगी।

वोटिंग का समय और मतगणना: मतदान सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक बैलेट पेपर के जरिए गुप्त रूप से कराया जाएगा। दोपहर 2 बजे वोटिंग खत्म होते ही वोटों की गिनती शुरू होगी और 21 सितंबर की शाम तक जयपुर के नए मेयर के नाम की आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी।

क्या किसी 'बाहरी' व्यक्ति को भी मेयर बना सकती है BJP?
जयपुर के राजनीतिक हलकों में इस बात की भी चर्चा चल रही है कि क्या भाजपा किसी ऐसे नेता को मेयर बना सकती है जो इस बार पार्षद का चुनाव नहीं जीता है। कानूनी और तकनीकी दृष्टिकोण से इसका जवाब 'हाँ' है। राजस्थान नगर पालिका (संशोधन) नियमों के अनुसार कोई भी व्यक्ति जो वार्ड पार्षद नहीं है या जिसने चुनाव नहीं लड़ा है, वह भी मेयर पद का चुनाव लड़ सकता है। इसके लिए केवल यह शर्त है कि वह व्यक्ति जयपुर नगर निगम क्षेत्र का पंजीकृत मतदाता हो और पार्षद पद की सभी कानूनी योग्यताएं पूरी करता हो।

हालांकि नियम के तहत यदि कोई गैर-पार्षद व्यक्ति मेयर चुना जाता है, तो उसे पद पर बने रहने के लिए 6 महीने के भीतर जयपुर नगर निगम के किसी भी वार्ड से उपचुनाव जीतकर आना अनिवार्य होता है। लेकिन सियासी जानकारों का मानना है कि भाजपा ऐसा कोई कदम नहीं उठाएगी। जब पार्टी के पास पहले से ही 78 जीतकर आए पार्षदों का स्पष्ट बहुमत मौजूद है, तो ऐसे में किसी बाहरी चेहरे को लाकर पार्टी अपने ही पार्षदों में बगावत या असंतोष का खतरा मोल नहीं लेना चाहेगी।

 

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