कॉकरोच प्रोटेस्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, जांच के लिए बनेगा हाई-लेवल पैनल; जानें कौन होंगे शामिल
नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने मं जंतर-मंतर पर पिछले महीने हुए छात्रों के विरोध प्रदर्शन से जुड़े गंभीर मुद्दों और आरोपों की स्वतंत्र जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति गठित करने का बड़ा फैसला लिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस समिति में सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश, पूर्व सीबीआई प्रमुख तथा अन्य अनुभवी सदस्यों को शामिल किया जाएगा। अदालत ने अंतिम आदेश जारी करने का संकेत दिया है, जिसमें हितधारकों और याचिकाकर्ताओं के सुझावों को भी शामिल किया जाएगा। समिति को प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई का पूरा सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराया जाएगा तथा महिला प्रदर्शनकारियों की कथित टारगेटिंग से जुड़ी शिकायतों की भी जांच की जाएगी।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे, ने मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि समिति के गठन पर अंतिम आदेश जारी किया जाएगा। अदालत ने कहा कि समिति में किन व्यक्तियों को सदस्य बनाया जाए, इस पर हितधारकों और याचिकाकर्ताओं के सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। पीठ ने सभी संबंधित पक्षों से अनुरोध किया कि वे उपयुक्त नामों और सुझावों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत करें, ताकि समिति का गठन पारदर्शी और संतुलित तरीके से हो सके।
सुप्रीम कोर्ट ने आगे निर्देश दिया कि विरोध प्रदर्शन और उसके दौरान हुई पुलिस कार्रवाई से संबंधित सभी सीसीटीवी फुटेज जांच समिति को उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे समिति को घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर समझने में मदद मिलेगी। अदालत ने विशेष रूप से उन महिला प्रदर्शनकारियों की शिकायतों और आरोपों पर भी गौर करने का निर्देश दिया, जिन्हें दिल्ली सहित अन्य क्षेत्रों में विरोध मार्च के दौरान कथित रूप से निशाना बनाया गया था। समिति इन महिलाओं द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट में इन मुद्दों को शामिल करेगी।
इस बीच, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन से जुड़े कुछ गंभीर आरोपों का खंडन किया। जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर कथित रूप से अत्यधिक बल प्रयोग का आरोप लग रहा है, जिसकी आलोचना हो रही है। दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उसने किसी भी प्रदर्शनकारी पर बड़े पैमाने पर निगरानी रखने के लिए फेसियल रिकग्निशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल नहीं किया। पुलिस का दावा है कि उसकी कार्रवाई कानून के दायरे में और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक थी।
