आईआईटी की नई पहल: कामकाजी पेशेवरों के लिए ऑनलाइन डिग्री और एग्जीक्यूटिव कोर्स का बढ़ता दायरा

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देश के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों की पहचान अब तक बीटेक, एमटेक और रिसर्च तक सीमित मानी जाती थी, लेकिन पिछले चार-पांच सालों में तस्वीर तेजी से बदली है। इंडियन इंस्टीट्यूट्स ऑफ टेक्नोलॉजी यानी IIT अब उस मैदान में भी कदम बढ़ा चुके हैं, जिसे कभी सिर्फ IIM का गढ़ माना जाता था एग्जीक्यूटिव एजुकेशन। शॉर्ट-टर्म सर्टिफिकेट कोर्स से लेकर पूरी तरह ऑनलाइन मास्टर डिग्री तक IIT अब कामकाजी पेशेवरों को नौकरी छोड़े बिना डिग्री हासिल करने का मौका दे रहे हैं। IIT और IIM की इस होड़ में कामकाजी पेशेवरों का खूब फायदा हो रहा है।

इस बदलाव के पीछे कई वजहें गिनाई जा रही हैं। कोरोना महामारी के बाद ऑनलाइन और हाइब्रिड पढ़ाई को जो स्वीकार्यता मिली, उसने इस ट्रेंड को रफ्तार दी। इसके अलावा स्किल अपग्रेड करने की बढ़ती मांग, इंडस्ट्री के साथ गहरे होते रिश्ते, और सबसे अहम बात यह कि सरकारी सब्सिडी वाले बीटेक कोर्स के उलट, ये एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम अपनी फीस से ही अपना खर्च निकाल लेते हैं।

IIT मद्रास इस मामले में सबसे आगे नजर आता है, जहां अब 20 से ज्यादा एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं। इलेक्ट्रिक व्हीकल से जुड़ा एक शुरुआती कोर्स अब बैटरी टेक्नोलॉजी, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल जैसे कई कोर्स में बदल चुका है। वहीं IIT बॉम्बे में तो आंकड़े खुद कहानी बयां करते हैं कि 2015 में जहां 95 प्रोग्राम में महज 2749 लोगों ने हिस्सा लिया था, 2020 में यह संख्या घटकर 1493 रह गई थी, लेकिन 2025 तक यह उछलकर करीब 20,000 तक पहुंच गई वो भी 133 प्रोग्राम के जरिए। IIT कानपुर की कहानी थोड़ी अलग है। यहां 2020 से पहले कोई भी ऑनलाइन एग्जीक्यूटिव पीजी डिग्री नहीं थी, लेकिन 2022 में eMasters पहल के तहत पहले चार कोर्स शुरू हुए। आज यहां नौ प्रोग्राम चल रहे हैं, जिनमें सात एमटेक, एक एमएससी और एक पीजी डिप्लोमा शामिल है।

इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, IIT गुवाहाटी के प्रोफेसर हेमंत कौशिक का कहना है कि हर IIT में क्लासरूम की जगह सीमित है, इसलिए डिजिटल शिक्षा ही आने वाला भविष्य है। उन्होंने बताया कि फ्लड एंड वॉटर रिसोर्स मैनेजमेंट में उनका ऑनलाइन एमटेक प्रोग्राम पिछले साल 66 छात्रों के साथ शुरू हुआ था, और इस साल अब तक 320 से ज्यादा ऑफर दिए जा चुके हैं, जिनमें असम सरकार से स्पॉन्सर्ड पेशेवर भी शामिल हैं।

बदलते जमाने के कोर्स की मांग सबसे ज्यादा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस की मांग सबसे ज्यादा है, लेकिन साथ ही IITs अब इलेक्ट्रिक व्हीकल, सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी, क्वांटम कंप्यूटिंग, सस्टेनेबिलिटी, रोबोटिक्स और साइबर सिक्योरिटी जैसे नए-नए क्षेत्रों में भी कोर्स ला रहे हैं। IIT मद्रास के प्रोफेसर विग्नेश मुथुविजयन के मुताबिक, आज के पेशेवर करियर ब्रेक लिए बिना ही अपनी स्किल अपग्रेड करना चाहते हैं, और इंडस्ट्री से करीबी जुड़ाव के चलते IIT को पता रहता है कि कहां स्किल गैप मौजूद है।

एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम और नियमित कोर्स में क्या है अंतर
फीस की बात करें तो एग्जीक्यूटिव प्रोग्राम नियमित कोर्स के मुकाबले काफी महंगे होते हैं। जैसे IIT गुवाहाटी में रोबोटिक्स एंड एआई और फ्लड एंड वॉटर रिसोर्स मैनेजमेंट के एमटेक कोर्स की फीस 8-8 लाख रुपये है, जबकि हेल्थकेयर प्रोडक्ट डेवलपमेंट एंड मैनेजमेंट में पीजी डिप्लोमा की फीस 3.5 लाख रुपये है। IIT खड़गपुर ने साफ किया कि यह फर्क कमाई की मंशा से नहीं, बल्कि ढांचागत मजबूरी से जुड़ा डिग्री प्रोग्राम को सरकारी फंडिंग मिलती है, जबकि एग्जीक्यूटिव कोर्स पूरी तरह सेल्फ-फाइनेंस्ड होते हैं। IIT रुड़की के प्रोफेसर सौमित्र सतपथी ने भी जोर देकर कहा कि क्वालिटी से समझौता किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं, और कई बार कंपनियों को मना भी करना पड़ा है। बहरहाल, दो दशकों से इस मैदान में मौजूद IIM के सामने अब IIT एक मजबूत प्रतिद्वंद्वी बनकर उभर रहे हैं।

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