सरकारी स्कूलों में बच्चों को कौन-कौन सी सुविधाएं मिलना जरूरी? जानिए RTE कानून क्या कहता है

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देशभर के ग्रामीण और सरकारी स्कूलों की बदहाल तस्वीर न केवल आने वाले भविष्य बल्कि उन सुविधाओं पर भी सवाल खड़ी कर रही है, जिससे छात्र पूरी तरह से बेखबर हैं. कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके की ओर से सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए 'स्कूल ठीक करो' अभियान के बाद यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया है. इस अभियान ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आजादी के इतने साल बाद भी हमारे सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले देश के बच्चे बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीने को मजबूर हैं. इस बीच एक सवाल तेजी से उठ रह है कि आखिर इन बच्चों को कौन-कौन सी सुविधाएं मिलनी चाहिए? लेकिन इससे पहले जान लेते हैं कि इसके लिए कानून क्या कहता है?

बच्चों के लिए कानून
शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 यानी RTE Act के तहत 6 से 14 साल  की उम्र के बच्चों के लिए फ्री और अनिवार्य शिक्षा का कानूनी ढांचा मौजूद है. इसी कानून की अनुसूची में स्कूल के लिए कई न्यूनतम मानक तय किए गए हैं. इनमें सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल, लड़कों और लड़कियों के लिए अलग शौचालय, कक्षाओं और शिक्षकों से जुड़े मानक, खेल का मैदान और दिव्यांग बच्चों के लिए सुविधाएं जैसे कई विषय शामिल हैंl

पानी और शौचालय सुविधा नहीं, बुनियादी अधिकार
किसी सरकारी स्कूल में बच्चे को पीने का सुरक्षित और पर्याप्त पानी नहीं मिलता है, तो इसे महज ‘स्कूल की कमी’ कहकर नहीं टाला जा सकता. RTE के तहत स्कूलों के बुनियादी ढांचे में सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था अपेक्षित है. इसके साथ ही लड़कों और लड़कियों के लिए अलग शौचालय का प्रावधान है. यानी मलतब साफ है कि स्कूल में टॉयलेट बना हुआ है या नहीं? असली सवाल है कि क्या वह इस्तेमाल लायक, साफ, सुरक्षित और बच्चों की जरूरत के मुताबिक है?

ये सुविधाएं भी हैं शामिल
शुद्ध पेयजल- हर स्कूल में बच्चों के लिए पीने के साफ पानी का पुख्ता इंतजाम होना अनिवार्य है. गर्मियों में ठंडे पानी की व्यवस्था भी नियमों का हिस्सा है l

शौचालय और स्वच्छता- स्कूलों में लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग जो यूज में आ सके शौचालय होने चाहिए. विशेषकर छात्राओं के लिए सैनिटाइजर, पानी और साफ-सफाई की उचित व्यवस्था होना उनका बुनियादी अधिकार है, जिसकी कमी के कारण अक्सर ग्रामीण इलाकों में लड़कियां पढ़ाई छोड़ देती हैं l

बिजली और वेंटिलेशन- क्लास में पर्याप्त रोशनी, पंखे और बिजली की सुचारू आपूर्ति होनी चाहिए ताकि भीषण गर्मी या उमस भरे मौसम में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो l

सुरक्षित बिल्डिंग और खेल का मैदान- स्कूल की इमारत सुरक्षित होनी चाहिए (जर्जर या टपकती छतें न हों). इसके अलावा बच्चों के शारीरिक विकास के लिए खेल का मैदान और बाउंड्री वॉल होना भी जरूरी है l

मिड-डे मील- बच्चों को पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण खाना मिलना उनका अधिकार है l

डिजिटल शिक्षा और कंप्यूटर- आधुनिक युग और बढ़ते टेक्नोलॉजी की मांग को देखते हुए अब स्कूलों में कंप्यूटर लैब और स्मार्ट क्लासरूम की परिकल्पना भी बच्चों के अधिकारों से जुड़ चुकी है, ताकि वे तकनीकी दौर में पीछे न छूटें l

क्या हर सरकारी स्कूल में कंप्यूटर है जरूरी?
लेकिन इस बीच जो सवाल खड़ा हो रहा है , वह ये है कि क्या हर सरकारी स्कूल में कंप्यूटर होने अनिवार्य है? RTE की मूल न्यूनतम अनुसूची में हर प्राथमिक स्कूल में एक निश्चित संख्या में कंप्यूटर उपलब्ध कराने का अलग से प्रावधान नहीं है. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर सरकारी स्कूल में कंप्यूटर न होने का मतलब सीधे RTE का उल्लंघन है. लेकिन इसका मतलब ये भी नहीं है कि डिजिटल शिक्षा सरकार की प्राथमिकता नहीं है. कंप्यूटर रूम, ICT सुविधाएं, स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल बोर्ड और दूसरी डिजिटल शिक्षा सुविधाओं के लिए प्रावधान हैं. मौजूदा दिशा-निर्देशों में स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ कंप्यूटर रूम और डिजिटल संसाधनों को भी शामिल किया गया है l  

क्या है 'स्कूल ठीक करो' अभियान?
बता दें कि अभिजीत दिपके के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के जरिए सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. रिपोर्ट में स्कूल दौरों और बुनियादी सुविधाओं को लेकर उठाए गए सवालों का जिक्र हुआ है. इतना ही उन्होंने  इसके लिए अभिभावकों को भी आगे आने के लिए कहा है l 

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