ब्रिक्स डेलीगेट्स का भोपाल के पर्यटन स्थलों ने मोहा मन
भोपाल
मध्यप्रदेश का दिल और 'झीलों की नगरी' भोपाल इन दिनों ऐतिहासिक और गौरवशाली आयोजन का साक्षी बन रहा है। ब्रिक्स सम्मेलन न केवल देशों के बीच सांस्कृतिक सेतु का कार्य कर रहा है, बल्कि ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः – हार्मनी फॉर ऑल’ की पावन भावना को भी जीवंत कर रहा है। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स देशों की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और प्राचीन परंपराओं को एक मंच पर पिरोना, कलात्मक सहयोग को बढ़ावा देना और पारंपरिक मानवीय मूल्यों को विश्व पटल पर स्थापित करना है।
भोपाल के पर्यटन स्थलों एवं अनुभव ने ब्रिक्स डेलीगेट्स का मन मोह लिया है। मध्यप्रदेश पर्यटन द्वारा अतिथियों के लिए विशेष भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। डेलीगेट्स ने हैरिटेज वॉक के माध्यम से भोपाल के ऐतिहासिक स्थल गौहर महल, इकबाल मैदान और ऐतिहासिक मोती मस्जिद के वास्तुशिल्प का अनुभव प्राप्त हुआ।
प्राकृतिक सौंदर्य से परिचित होते हुए, डेलीगेट्स ने वन विहार नेशनल पार्क की जैव-विविधता को सराहा और अपर लेक (बड़ा तालाब) में शिकारा की सैर का आनंद लिया। इसी दौरान बर्ड वाचिंग को उन्होंने अपने जीवन का एक यादगार और अद्वितीय अनुभव बताया। भ्रमण के अगले चरण में, अतिथियों ने भोपाल के जीवंत बाज़ारों—चौक बाज़ार, नया बाज़ार और भोपाल हाट—में हस्तकला और स्थानीय संस्कृति की अद्भुत झलक देखी। अपनी भारत यात्रा और विशेष रूप से भोपाल के हार्दिक आदर-सत्कार की प्रशंसा करते हुए डेलीगेट्स ने माना कि भोपाल न केवल अपने गौरवशाली अतीत को संजोए हुए है, बल्कि यह मेहमाननवाज़ी के मामले में भी विश्व के बेहतरीन केंद्रों में से एक है।
भोपाल की यादें, सांस्कृतिक सेतु और आत्मीयता का संगम : महानिदेशक हामिद मोस्तफवी
अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान एवं संगठनों के महानिदेशक, हामिद मोस्तफवी ने भोपाल की अपनी यात्रा को एक 'बेहद खूबसूरत और यादगार' अनुभव बताया है। वन विहार नेशनल पार्क के भ्रमण के उपरांत उन्होंने न केवल इस स्थल की प्राकृतिक विशेषताओं और वैज्ञानिक महत्व की सराहना की, बल्कि यहाँ की ज्ञानवर्धक जानकारी को भी अत्यंत सराहा। मोस्तफवी ने भोपाल की सुंदरता और ऐतिहासिक गौरव को रेखांकित करते हुए कहा कि यहाँ की समृद्ध वनस्पति और पक्षियों की विविधता पर्यटकों को सहज ही आकर्षित करती है। भारत और ईरान के बीच सदियों पुराने संबंधों को याद करते हुए मोस्तफवी ने कहा कि हिंदी और फारसी भाषाओं में मौजूद शब्दगत समानताएं, दोनों राष्ट्रों के गहरे सांस्कृतिक जुड़ाव और साझा विरासत का जीवंत प्रमाण हैं। उन्होंने इन भाषाई संबंधों को दोनों देशों के बीच मैत्री का एक मजबूत सेतु बताया। भोपाल में मिले स्नेह और आतिथ्य से अभिभूत मोस्तफवी ने आभार व्यक्त करते हुए कहा, "यहाँ की आत्मीय मेहमाननवाज़ी हृदय में सदा याद रहेगी।
मध्यप्रदेश आकर बहुत खुशी हुई -ईरान के उप मंत्री के सलाहकार अयूब देहघांकर
ईरान के सांस्कृतिक मामलों के उप मंत्री के सलाहकार अयूब देहघांकर ने वन विहार नेशनल पार्क के भ्रमण के दौरान कहा कि उन्हें यहां आकर खुशी हुई। वन विहार में पृथ्वी और हमारी प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। इस तरह के प्रयास न केवल हमारी धरती और प्राकृतिक धरोहर को संरक्षित करने में सहायक हैं, बल्कि इनका लाभ पूरी दुनिया को मिलता है। ऐसे महत्वपूर्ण प्रयासों के लिए हम आयोजकों और इससे जुड़े सभी लोगों का हृदय से धन्यवाद करते हैं।
भोपाल भ्रमण करना मेरे लिए बेहद अनूठा और यादगार अनुभव: हाइिलिंग
चीन से आए हाइिलिंग ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश ने उनका मन मोह लिया है। यहां भ्रमण करना उनके लिए बेहद अनूठा और यादगार अनुभव रहा। यहां हमने न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लिया, बल्कि पक्षियों, सरीसृपों, बाघों और यहां की जैव विविधता के बारे में भी बहुत कुछ जानने का अवसर मिला। सबसे खास बात यहां मिली आत्मीय मेहमाननवाजी और पेशेवर मार्गदर्शन रहा। स्थानीय मेजबानों ने जिस गर्मजोशी और समर्पण के साथ हमारा स्वागत किया, वह बेहद सराहनीय है। इसके लिए मैं सभी का हृदय से धन्यवाद करता हूं। उन्होंने कहा कि वह दुनियाभर के पर्यटकों से आग्रह करेंगे कि सभी मध्यप्रदेश की प्राकृतिक एवं वन्यजीव संपदा का अनुभव अवश्य लें।
झीलों की नगरी के आतिथ्य, समृद्ध जैव-विविधता और सांस्कृतिक धरोहर ने वैश्विक मंच पर भारत की छाप को और अधिक प्रगाढ़ किया है। ब्रिक्स प्रतिनिधियों की यह सराहना दोनों देशों के बीच मजबूत होते सांस्कृतिक और मानवीय संबंधों का प्रमाण है। भोपाल की यह खूबसूरत यात्रा सभी डेलीगेट्स के हृदयों में सदैव एक अमिट छाप बनकर हमेशा ताजा रहेगी। यह आयोजन अंततः 'वसुधैव कुटुंबकम' और 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' के संदेश को पूरी दुनिया में प्रसारित करने में पूर्णतः सफल रहा है।
