बीकानेर के धोरों में उगी देशी खुंभी, ग्रामीणों की बढ़ी आमदनी

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बीकानेर
 मरुस्थल में बारिश की फुहार खेतों में हरियाली लाने के साथ रेतीले धोरों में प्रकृति की अनमोल सौगात भी बिखेर देती है। इन दिनों बज्जू क्षेत्र के धोरों में स्वत: उगने वाली देशी खुंभी (मशरूम) की बहार छाई है। सुबह सूरज निकलने से पहले ही खुंभी के शौकीन टोकरी लेकर जंगलों और धोरों की ओर निकल पड़ते हैं। कुछ लोग इसे घरेलू उपयोग के लिए एकत्र कर रहे हैं, तो कई परिवार बिक्री के जरिए अतिरिक्त आमदनी जुटा रहे हैं।

लगातार हुई बारिश और मिट्टी में बनी नमी के चलते रेतीली जमीन से बड़ी संख्या में सफेद खुंभियां निकल रही हैं। यह प्राकृतिक उपज साल में सीमित अवधि के दौरान ही दिखाई देती है, इसलिए इसकी मांग भी काफी रहती है। बारिश के बाद खुंभी तलाशना इन दिनों क्षेत्र में खास आकर्षण बना है।

बाजार में 400 से 500 रुपए किलो तक भाव
स्थानीय बाजारों में देशी खुंभी 400 से 500 रुपए प्रति किलो तक बिक रही है। अच्छी गुणवत्ता की खुंभी के भाव कई बार 700 रुपए प्रति किलो तक पहुंच जाते हैं। मांग अधिक होने से बाजार में पहुंचते ही अधिकांश खुंभी हाथों-हाथ बिक जाती है। बरसात के इन सीमित दिनों में यह प्राकृतिक उपज कई ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आय का अच्छा जरिया बन गई है।

खुंभी को खास बनाते हैं पारंपरिक उपयोग
ग्रामीण क्षेत्रों में देशी खुंभी का उपयोग लंबे समय से खाद्य पदार्थ के रूप में किया जाता रहा है। इसे ताजा सब्जी के रूप में पकाने के अलावा धूप में सुखाकर पाउडर भी तैयार किया जाता है। ग्रामीणों के अनुसार अच्छी गुणवत्ता वाले सूखे खुंभी पाउडर की कीमत 1,000 से 2,000 रुपए प्रति किलो तक पहुंच जाती है। इसका उपयोग घी, मक्खन, दूध, राब या मक्की के साथ करने की परंपरा भी कई इलाकों में रही है।

पोषक तत्वों से भरपूर
देशी खुंभी में प्रोटीन, फाइबर, विटामिन-बी, विटामिन-डी और विभिन्न खनिज पाए जाने के कारण इसे पौष्टिक खाद्य पदार्थ माना जाता है। ग्रामीणों का मानना है कि ताजी खुंभी की सब्जी और सूखे पाउडर का सेवन शरीर को ताकत देने के साथ जोड़ों व हड्डियों के दर्द में भी राहत पहुंचाने में सहायक होता है। कोच रामावतार सैन के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में इसका उपयोग लंबे समय से पारंपरिक तौर पर किया जाता रहा है। हालांकि स्वास्थ्य संबंधी लाभों के लिए संतुलित आहार और विशेषज्ञ की सलाह को भी जरूरी माना जाता है।

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