सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन के प्रमुख मंदिरों का होगा कायाकल्प, श्रद्धालुओं को मिलेंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं

Share on Social Media

उज्जैन
 सिंहस्थ-2028 के लिए उज्जैन के प्रमुख मंदिरों के कायाकल्प की व्यापक तैयारी शुरू हो गई है। प्रशासन ने सात प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए ऐसा मास्टर प्लान तैयार किया है, जिसका उद्देश्य केवल सुंदरीकरण नहीं बल्कि मंदिरों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त व्यवस्थित धार्मिक परिसरों में बदलना है, ताकि श्रद्धालुओं को सहज, सुरक्षित और सुविधाजनक दर्शन व्यवस्था मिल सके।

उल्लेखनीय है कि ज्योतर्लिंग परिसर में महाकाल लोक के निर्माण के बाद उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। इसी बढ़ती धार्मिक पर्यटन गतिविधि को देखते हुए उज्जैन के अन्य प्रमुख मंदिरों के विकास की तैयारी की गई है।

इन मंदिरों का होगा कायाकल्प
मध्य प्रदेश सरकार से तैयार इस योजना में महाकाल ज्योतिर्लिंग के अतिरिक्त श्री कालभैरव मंदिर, श्री मंगलनाथ मंदिर, श्री सिद्धवट, श्री अंगारेश्वर मंदिर, श्री सांदीपनि आश्रम, श्री भूखी माता मंदिर और श्री नवग्रह शनि मंदिर को शामिल किया गया है। प्रत्येक मंदिर के आसपास उपलब्ध भूमि, श्रद्धालुओं की संख्या और भविष्य में बढ़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ को ध्यान में रखकर अलग-अलग विकास योजनाएं बनाई गई हैं।

ये सुविधाएं होंगी विकसित
योजना का सबसे बड़ा हिस्सा मंदिर परिसरों के विस्तार से जुड़ा है। असल में, कई प्रमुख मंदिरों में वर्तमान में सीमित स्थान होने के कारण पर्व और विशेष अवसरों पर भारी भीड़ से अव्यवस्था की स्थिति बन जाती है। ऐसे में आवश्यकता अतिरिक्त भूमि शामिल कर इन मंदिरों में खुले और बड़े परिसर विकसित किए जाएंगे। श्रद्धालुओं को लंबी कतारों और अव्यवस्थित भीड़ से राहत देने के लिए प्रवेश और निकास के अलग-अलग मार्ग तैयार किए जाएंगे।

प्रतीक्षा क्षेत्र विकसित किए जाएंगे, ताकि दर्शन व्यवस्था अधिक सुगम और समयबद्ध हो सके। मास्टर प्लान के अनुसार, इन मंदिरों के आसपास बड़े पार्किंग हब और फेसिलिटी सेंटर भी विकसित किए जाएंगे। इनमें शौचालय, पेयजल, प्रसाद केंद्र, विश्राम स्थल और सूचना केंद्र जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

सुरक्षा पर भी विशेष फोकस
मंदिरों में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को भी योजना का प्रमुख हिस्सा बनाया गया है। मंदिर परिसरों में सीसीटीवी निगरानी, बैरिकेडिंग, नियंत्रण कक्ष और आपातकालीन निकास मार्ग विकसित किए जाएंगे, ताकि सिंहस्थ और बड़े आयोजनों के दौरान भीड़ को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि विकास कार्यों में मंदिरों की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। निर्माण कार्यों में पारंपरिक स्थापत्य और प्राकृतिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *