श्रमिकों का गुस्सा या साजिश? नोएडा हिंसा के पीछे संगठित गिरोह की जांच शुरू

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नोएडा

 उत्तर प्रदेश के नोएडा फेज दो स्थित कंपनी के दफ्तर से शुरू हुआ कर्मचारियों का आंदोलन सोमवार को उग्र रूप ले लिया। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कई कंपनियों में कर्मचारियों को बाहर निकाल कर इकाई को बंद कराया गया। इसके बाद सड़कों पर उतर कर कर्मचारी प्रदर्शन करते दिखे। शहर के कई हिस्सों में प्रदर्शन हुए। अब इसके पीछे किसी प्रकार की साजिश का अंदेशा जताया जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि कर्मचारियों को भड़का कर उग्र आंदोलन कराया गया। मामले की जांच के लिए एसटीएफ को लगाया गया है। एसटीएफ हिंसक और उग्र आंदोलन को भड़काए जाने की जांच करेगी।

नोएडा में श्रमिकों के आंदोलन को लेकर लखनऊ तक हलचल दिखी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने श्रमिकों की समस्याओं के समाधान और जांच के लिए औद्योगिक विकास आयुक्त की अध्यक्षता में कमिटी गठित की है। कमिटी की अनुशंसा के आधार पर न्यूनतम वेतनमान में अंतरिम वृद्धि का आदेश जारी किया गया है। तीनों प्रकार के श्रमिकों के वेतन में लगभग 21 फीसदी की वृद्धि की घोषणा की गई है। वहीं, पुलिस और प्रशाासन घटना की जांच और एक्शन में जुट गई है।

नोएडा पुलिस का एक्शन तेज
नोएडा पुलिस का मामले में एक्शन तेज हो गया है। नोएडा में मजदूरों के विरोध पर पुलिस कमिश्नर, गौतमबुद्धनगर लक्ष्मी सिंह का बड़ा बयान आया है। सीपी ने कहा कि कल हमारी ओर से अलग-अलग स्थानों पर हुई घटनाओं को लेकर 7 एफआईआर दर्ज की गई है। उपद्रव के मामले में 300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनको उकसाने की दिशा में जो लोग चिह्नित किए गए थे, उनकी भी गिरफ्तारियां की गई हैं। सीपी ने कहा कि आने वाले दिनों में भी कुछ गिरफ्तारियां की जाएगी।

सीपी ने जताया संदेह
पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने मंगलवार को कहा कि सोमवार को नोएडा में 83 स्थानों पर 42 हजार से अधिक कर्मचारी सड़कों पर उतरे थे। दो स्थानों पर हिंसक प्रदर्शन हुआ। इस दौरान पुलिस ने न्यूनतम बल प्रयोग करते हुए श्रमिकों के प्रदर्शन को काबू में लाया गया। सीपी ने कहा कि अन्य स्थानों पर प्रदर्शनकारी कर्मचारियों को समझा-बुझाकर वापस भेजा गया। सीपी ने कहा कि जो श्रमिक हैं, ऐसा पता चला है कि कोई एक ग्रुप है जो उन्हें पीछे से उकसा रहा है। पीछे से बहुत व्यवस्थित तरीके से चीजों को आगे बढ़ा रहा है।

सीपी ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में ऐसे बहुत से फर्जी ट्विटर और अन्य अकाउंट बनाए गए हैं। इसके माध्यम से लगातार श्रमिकों को उकसाने, हिंसा, फैक्टरियों में आगजनी करने, पुलिस से भिड़ने के लिए उकसाया जाता रहा है। कल 2 अकाउंट के बारे में पता लगा था। पिछले 2 दिनों में श्रमिकों के 2 वाट्सएप ग्रुप बनाए गए हैं, जिसमें QR कोड स्कैन करके ग्रुप में जोड़ा रहा है।

पुलिस करेगी फंडिंग की जांच
पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने कहा कि पूरे मामले की जांच के क्रम में सामने आया है कि पीछे से कोई संगठित गिरोह कर्मचारियों को भड़का रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने इस मामले में कुछ लोगों को भीड़ में से चुनकर गिरफ्तार किया गया है। आगे भी इस प्रकार के लोगों की गिरफ्तारियां सुनिश्चित की जाएगी। इनकी फंडिंग की भी जांच की जाएगी। अगर जांच में आता है कि देश या प्रदेश के बाहर से इन लोगों को फंडिंग की गई है तो इस दिशा में भी काम किया जाएगा।

मंगलवार को भी प्रदर्शन
नोएडा के फेज 2 इलाके में एक कंपनी के कर्मचारियों ने कंपनी के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। कर्मचारी वेतन वृद्धि सहित अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर पुलिसकर्मी मौजूद रही। इस दौरान श्रमिकों की ओर से किसी प्रकार की हिंसक गतिविधि की खबर अब तक नहीं है।

 

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