गिले-शिकवे मिटाकर एक हुए चाचा-भतीजा, लेकिन ‘एका’ वाले शहरों में फिर भी भारी पड़ी भाजपा

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पुणे
BMC समेत महाराष्ट्र की 29 महा नगरपालिकाओं के चुनाव नतीजे आने शुरू हो गए हैं। ताजा रुझानों के मुताबिक, महाराष्ट्र के लगभग सभी बड़े शहरों में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरती दिख रही है। BMC में पहली बार ठाकरे परिवार के हाथ से सत्ता फिसलती नजर आ रही है और भाजपा-शिंदे सेना गठबंधन बहुमत की तरफ बढ़ती दिख रही है। दोपहर 12.30 बजे तक BMC की 227 में से 167 सीटों पर आए रुझानों के मुताबिक, भाजपा गठबंधन को 102 सीटें मिलती दिख रही हैं। BMC में उद्धव सेना की अगुवाई ाले गठबंधन को 57 सीटें मिलती दिख रही हैं, जबकि कांग्रेस को तीन सीटें मिलती दिख रही हैं। बड़ी बात यह है कि देवेंद्र फडनवीस सरकार में उपमुख्यमंत्री अजित पवार की NCP के खाते में यहां एक भी सीट मिलती नहीं दिख रही है।
 
दूसरी तरफ, पुणे और पिंपरी-चिंचवड़, जहां चाचा-भतीजे (शरद पवार और अजित पवार) की NCP ने गिले-शिकवे भुलाकर गठबंधन किया, वहां भी भाजपा उन पर भारी पड़ती दिख रही है। इन दोनों प्रमुख शहरों में एनसीपी के दोनों गुटों ने "परिवार की एकजुटता" और विकास के नाम पर आपसी गठबंधन किया है। दोनों ने मिलकर पुणे नगर निगम (PMC) के लिए एक संयुक्त घोषणापत्र भी जारी किया था।

पुणे में भाजपा सबसे आगे
ताजा रुझानों के मुताबिक, पुणे की 165 सीटों में से 122 पर आए रुझानों के मुताबिक भाजपा गठबंधन 90 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि दोनों NCP को मिलाकर सिर्फ 20 सीटें मिलती दिख रही हैं। इनमें अजित पवार गुट को 20 और शरद पवार गुट को 00 सीटें मिलती दिख रही हैं। उद्धव गुट वाले गठबंधन को कुल 10 सीटें मिलती दिख रही हैं। इनमें सभी 10 कांग्रेस को जबकि उद्धव सेना और MNS को इस गठबंधन में कोई सीट मिलती नहीं दिख रही है।

शरद पवार की NCP का बुरा हाल
पिंपरी-चिंचवाड़ की बात करें तो यहां कुल 128 सीटों में से 119 पर रुझान आ गए हैं। ताजा रुझानों के मुताबिक, यहां भी पवार फैमिकी की एका पर भाजपा भारी पड़ती दिख रही है। भाजपा गठबंधन को यहां 70 सीटें मिलती दिख रही हैं, जबकि NCP गठबंधन को 41 सीटें मिलती दिख रही हैं। इनमें अजित पवार गुट को 40 जबकि शरद पवार गुट को सिर्फ एक सीट मिलती दिख रही है। उद्धव ठाकरे की सेना को यहां एक सीट भी मिलती नहीं दिख रही, जबकि उनके भाई राज ठाकरे की MNS को एक सीट मिलती दिख रही है। कांग्रेस और प्रकाश आंबेडकर के गठबंधन को एक भी सीट नहीं मिलती दिख रही है।

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