अमेरिकी धमकियों के बीच मुस्लिम एकजुटता, शिया-सुन्नी देशों का साझा संदेश—ईरान को सऊदी अरब का समर्थन
तेहरान
अमेरिका की ओर से ईरान को लगातार हमले की धमकियां दी जा रही हैं। इस बीच इस्लामिक जगत में शिया और सुन्नी मुसलमान देशों के बीच के मतभेद खत्म होते दिख रहे हैं। अमेरिकी हमले की स्थिति में सऊदी अरब ने ईरान को भरोसा दिया है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देगा। सऊदी अरब ने ईरान को बताया है कि वह अपनी जमीन का उसके खिलाफ हमलों में इस्तेमाल नहीं होने देगा। यही नहीं वह अपने एयरस्पेस से भी ऐसे किसी लड़ाकू विमान को गुजरने नहीं देगा, जिसका मकसद ईरान पर हमला करना हो। सऊदी अरब की ओर से ईरान को मिला यह भरोसा अहम माना जा रहा है।
वॉशिंगटन से कई बार ईरान को धमकी मिल चुकी है, जिसमें उसने कहा कि यदि प्रदर्शनकारियों पर सख्ती बरती गई तो वह सैन्य हस्तक्षेप करेगा। सऊदी अरब को अमेरिका के करीबी दोस्तों में शुमार किया जाता है। इसके अलावा शिया और सु्न्नी विवाद के कारण भी ईरान और सऊदी अरब के बीच एक दूरी रही है। ऐसे में सऊदी अरब की तरफ से ईरान को भरोसा दिया जाना बड़ा संकेत है। खासतौर पर तब जबकि पाकिस्तान समेत किसी भी इस्लामिक देश ने ईरान के साथ एकता की बात नहीं की है। पाकिस्तान अकसर इस्लामिक एकता का राग अलापता रहा है, लेकिन अमेरिकी की ओर से ईरान को मिल रही धमकियों के बाद भी वह चुप है।
अमेरिका के मिडल ईस्ट में कई ठिकाने, सऊदी अरब में भी
सऊदी विदेश मंत्रालय के एक सूत्र ने एएफपी को बताया, 'हमारी ओर से ईरान को स्पष्ट कर दिया गया है कि सऊदी अरब उसके खिलाफ किसी भी अलायंस का हिस्सा नहीं बनेगा। इसके अलावा हम ईरान पर हमले के लिए अपनी जमीन और एयरस्पेस का भी इस्तेमाल नहीं होने देंगे।' अमेरिका के मिडल ईस्ट में कई ठिकाने हैं। इनमें से कुछ सऊदी अरब में भी हैं। माना जाता रहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी जंग में सऊदी अऱब किसी का पक्ष नहीं लेगा। उसका अब भी ऐसा ही स्टैंड है, लेकिन ईरान को उसने जो भरोसा दिया है, वह अहम है। बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव इस कदर है कि तेहरान ने एयरस्पेस बंद कर दिया है।
