US-ईरान टकराव में पाकिस्तान फंसा, तीन बड़े संकट एक साथ—आसिम मुनीर ने बुलाई इमरजेंसी बैठक

Share on Social Media

नई दिल्ली
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों को यह कहकर और हवा दे दी है कि प्रदर्शनकारी संस्थाओं पर कब्जा करें, मदद पहुंच रही है। अब इस बात को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं कि अमेरिका प्रदर्शनकारियों को किस तरह की मदद पहुंचाने जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई का भी प्लान बना रहा है। दूसरी तरफ, ईरान ने भी अमेरिका को दो टूक कहा है कि वह चुप बैठने वाला नहीं है और किसी भी सैन्य कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब देगा।
 
इन सबके बीच, पाकिस्तान टेंशन में आ गया है। वह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से परेशान है। पाकिस्तान की सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व को अब चिंता सता रही है कि अगर ईरान और अइमेरिका के बीच जंग छिड़ी तो उसकी मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। पहले से ही कई मोर्चों पर बदहाली झेल रहे पाकिस्तान में अब नए मोर्चों पर हालात बिगड़ने की आशंका के बीच पाकिस्तान के फील्ड मार्शल और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने आपात बैठक की है।

दो सीमाई मोर्चों पर दबाव
सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि इस हाई लेवेल मीटिंग में ISI प्रमुख और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जनरल असीम मलिक, साउदर्न कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल राहत नसीम, मिलिट्री इंटेलिजेंस प्रमुख, चीफ ऑफ जनरल स्टाफ और अन्य वरिष्ठ जनरल शामिल हुए। इस बैठक में सबसे बड़ी चिंता पाकिस्तान–ईरान सीमा को लेकर जताई गई है। अधिकारियों ने चेताया कि पाकिस्तान पहले ही अफगानिस्तान के साथ डूरंड लाइन पर तनाव झेल रहा है और ऐसे में ईरान सीमा पर नया संकट देश के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

अमेरिका मांग सकता है पाकिस्तानी ठिकाने?
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में इस आशंका पर भी गंभीर चर्चा हुई कि अगर अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई करता है, तो वह पाकिस्तान से हवाई क्षेत्र या सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की मांग कर सकता है। ऐसी स्थिति में पाकिस्तान के लिए फैसला लेना बेहद मुश्किल होगा, क्योंकि इससे देश के भीतर राजनीतिक विरोध और क्षेत्रीय तनाव, दोनों बढ़ सकते हैं।

पाक के अंदर अशांति और विद्रोह का डर
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि ईरान-अमेरिका जंग में अगर पाकिस्तान ने अमेरिका का साथ दिया तो उसे आंतरिक समस्या का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि देश की लगभग 30 फीसदी आबादी शिया है, जो ईरान के प्रति सहानुभूति रखती है। ऐसे में अगर ईरान पर अमेरिकी हमला होता है या वहां सत्ता परिवर्तन की कोशिश होगी। इससे पाकिस्तान में बड़े पैमाने पर शियाओं का विरोध प्रदर्शन शुरू हो सकता है। इसके अलावा, ईरान से शरणार्थियों के आने से सीमा पर दबाव और बढ़ सकता है।

हाई अलर्ट पर पाक सेना
सूत्रों के अनुसार, जनरल आसिम मुनीर ने सभी वरिष्ठ कमांडरों को हाई अलर्ट पर रहने और हालात पर करीबी नजर रखने के निर्देश दिए हैं। वहीं ISI प्रमुख को ईरान, तुर्की, कतर, यूएई, सऊदी अरब और अमेरिका के साथ राजनयिक और सुरक्षा स्तर की बातचीत तेज करने को कहा गया है, ताकि हालात को बिगड़ने से रोका जा सके।

क्षेत्रीय अस्थिरता की चेतावनी
खुफिया आकलन में कहा गया है कि पाकिस्तान, सऊदी अरब, कतर और तुर्की पहले ही अमेरिका को यह संदेश दे चुके हैं कि ईरान पर हमला पूरे पश्चिम एशिया को अस्थिर कर सकता है। हालांकि, अधिकारियों ने मानना कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की सरकार आगे बढ़ती है और पाकिस्तान पर सहयोग का दबाव डालती है, तो इस्लामाबाद को गंभीर रणनीतिक और राजनीतिक नुकसान उठाने पड़ सकते हैं।

देश के भीतर एकजुटता की कोशिश
ऐसे में बाहरी दबावों के बीच पाकिस्तान की सेना ने घरेलू मोर्चे पर भी तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, सेना मुख्यालय में नेशनल पैग़ाम-ए-अमन कमेटी के तहत धार्मिक विद्वानों का एक प्रतिनिधिमंडल बुलाया गया है। उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर एकजुट संदेश देने पर ज़ोर दिया गया है। बैठक में यह भी कहा गया कि भारत और सीमा पार सक्रिय आतंकी संगठनों द्वारा चलाए जा रहे कथित मनोवैज्ञानिक युद्ध का जवाब एक साझा राष्ट्रीय नैरेटिव से दिया जाना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *