एआई से पूरी तरह बदल जाएगी गांव की स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर: डॉ. पिंकी जोवल

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– उत्तर प्रदेश एआई एंड हेल्थ इनोवेशन कान्फ्रेंस के दूसरे दिन एआई एक्सपर्ट ने रखे अपने विचार

– बोले, तकनीक अगर सही तरीके से अपनाई जाए, तो मजबूत बनेंगी देश की स्वास्थ्य सेवाएं

– एआई के जरिये शहरी और ग्रामीण इलाकों के बीच का फर्क काफी हद तक किया जा सकता है कम  

लखनऊ,

 स्वास्थ्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की भूमिका को लेकर होटल द सेंट्रम में आयोजित दो दिवसीय उत्तर प्रदेश एआई एंड हेल्थ इनोवेशन कान्फ्रेंस के दूसरे दिन मंगलवार को एआई एक्सपर्ट ने अपने विचार रखे। एक्सपर्ट बोले, तकनीक अगर सही तरीके से अपनाई जाए, तो वह देश की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बना सकती है। खासतौर पर शहरी और ग्रामीण इलाकों के बीच जो फर्क है, उसे एआई के जरिए काफी हद तक कम किया जा सकता है।

एआई का असली फायदा तब जब फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स को सशक्त बनाए
चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण सचिव डॉ. पिंकी जोवेल ने कहा कि एआई का असली फायदा तब मिलेगा, जब यह फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स को सशक्त बनाए। आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम और डॉक्टर ही गांव-गांव तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाते हैं। अगर तकनीक इनकी मदद करे, तो इलाज समय पर और बेहतर हो सकता है। उन्होंने टेलीमेडिसिन और रिमोट केयर को बढ़ाने पर भी जोर दिया, ताकि दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को भी आसानी से डॉक्टरों की सलाह मिल सके। उन्होंने कहा कि करीब 1.80 लाख आशा कार्यकता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम और चीफ हेल्थ ऑफिसर प्रदेश और देश की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं। ये कर्मचारी गांव और कस्बों में लोगों से सीधे जुड़े होते हैं। एआई आधारित टूल्स ऐसे होने चाहिए, जो इनके रोजमर्रा के काम को आसान बनाएं, न की बोझ बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर जैसे केंद्रों में एआई का सही इस्तेमाल कर दूरस्थ इलाकों में भी अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं दी जा सकती हैं।

एआई को सफल बनाने के लिए विभागों में तालमेल जरूरी
विभिन्न सत्रों में एआई समाधानों की बात हुई।  जो पहले से ही मैदान में काम कर रहे हैं, उनका मकसद है बीमारी को शुरू में ही पहचानना और मरीज को सही समय पर सही अस्पताल तक पहुंचाना। विशेषज्ञों ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई को सफल बनाने के लिए विभागों के बीच तालमेल बहुत जरूरी है। सिर्फ स्वास्थ्य विभाग ही नहीं, बल्कि अन्य सरकारी विभागों को भी मिलकर काम करना होगा। नीति बनाने से लेकर उसे लागू करने तक, हर स्तर पर सहयोग होगा, तभी एआई का सही फायदा मिलेगा। इससे गांव स्तर से लेकर बड़े अस्पतालों तक, हर जगह एक जैसी और बेहतर सेवाएं दी जा सकेंगी।

मरीज की सहमति के बिना एआई बेस्ड डाटा का न हो इस्तेमाल
पैनल में शामिल एआई एक्सपर्ट ने कहा कि जब देश की करीब आधी आबादी महिलाएं और बच्चे हैं, तब उनके स्वास्थ्य डाटा की सुरक्षा बहुत जरूरी है। मरीज की सहमति के बिना डाटा का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। पारदर्शिता और भरोसा ही किसी भी मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था की नींव होती है। अगर लोग सिस्टम पर भरोसा करेंगे, तभी वे नई तकनीक को अपनाएंगे। एआई की मदद से मातृ मृत्यु दर को कम किया जा सकता है। एआई आधारित सिस्टम गर्भवती महिलाओं में खतरे के संकेत पहले ही पहचान सकता है। इससे आशा कार्यकर्ता समय रहते महिला को अस्पताल तक पहुंचा सकती हैं। गांव स्तर पर जल्दी पहचान और सही रेफरल से मां और बच्चे दोनों की जान बचाई जा सकती है।
    कार्यक्रम में अरविंद कुमार महानिदेशक, सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया, प्रो. आर के सिंह एसजीपीजीआई, डॉ. संजय सूद सी-डैक, मोहाली, प्रो. श्री राम गणपति और कर्नल समीर कंवर डीजी, पाथ आदि विशेषज्ञ शामिल हुए।

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