अशोकनगर की नेनशु बनी लड़का, अनीता से शादी के लिए लड़की से लड़का बनी, इंदौर में हुआ प्यार

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अशोकनगर
 प्रेम गली अति सांकरी, जा में दो न समाय… संत कबीरदास की इन पंक्तियों का अर्थ बड़ा ही गहरा है। इन पंक्तियों में संत कबीरदास कहते हैं कि प्रेम का मार्ग इतना संकरा यानी कि तंग होता है कि उसमें दो व्यक्ति 'मैं' और 'तुम' एक साथ नहीं रह सकते। यहां 'मैं' से उनका अर्थ अहंकार से है। सच है कि प्रेम के लिए आपको व्यक्तिगत पहचान से निकलकर एक होना पड़ता है। अशोकनगर में प्रेम की इसी पराकाष्ठा को पार करते हुए 25 साल की नेनशु ने अपनी पहचान ही बदल दी। नेनशु अब 'नेनशु' न होकर नमन बन गई हैं। कहानी बड़ी दिलचस्प है, आइए जानते हैं।

6 लाख खर्च, तीन ऑपरेशन हुए
मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले की 25 वर्षीय नेनशु ने अपने प्यार को पाने के लिए लिंग परिवर्तन करवाया और अनीता से शादी कर ली है। उन्होंने छह लाख रुपये खर्च कर यह सर्जरी करवाई, जिसमें तीन जटिल ऑपरेशन शामिल थे। यह कहानी प्यार की ताकत और सामाजिक बेड़ियों को तोड़ने का एक उदाहरण है। नेनशु (नमन) अशोकनगर की पिपरई तहसील के बरखेड़ा गांव की रहने वाली हैं। नेनशु ने अपने प्यार को मुकम्मल करने के लिए समाज की रूढ़ियों से लड़ाई लड़ी और अपना जेंडर भी बदलवाया। अब नेनशु ‘नमन’ बनकर अपनी जीवनसंगिनी अनीता के साथ नई जिंदगी शुरू कर चुके हैं।

इंदौर में हुई थी दोनों की मुलाकात
उन्होंने बताया कि वह जन्म से लड़की थीं, लेकिन उनकी भावनाएं हमेशा लड़कों जैसी रहीं। यह उनके लिए एक आंतरिक संघर्ष था जिसे उन्होंने अपने प्यार के लिए दूर किया। करीब तीन साल पहले पढ़ाई के लिए इंदौर गई थीं, जहां सोशल मीडिया के जरिये असम की अनीता राजवर से उनकी पहचान हुई। यह मुलाकात उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। उनकी दोस्ती जल्द ही प्यार में बदल गई। दोनों एक-दूसरे के प्रति गहरा लगाव महसूस करने लगे।

नौकरी करते हुए बचाए सर्जरी के लिए पैसे
दोनों साथ रहना चाहते थे, लेकिन समाज में पति-पत्नी के रूप में पहचान पाने के लिए जेंडर चेंज सर्जरी ही एकमात्र रास्ता था। यह एक बड़ी चुनौती थी जिसे उन्होंने स्वीकार किया। दिल्ली के डाक्टरों ने सर्जरी पर करीब छह लाख रुपये खर्च बताया। यह राशि उनके लिए बहुत बड़ी थी। मध्यमवर्गीय परिवार के लिए यह बड़ी रकम थी, लेकिन नमन और अनीता ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपने लक्ष्य को प्राप्त करने का दृढ़ निश्चय किया। दोनों ने इंदौर में छोटी-छोटी नौकरियां कीं, खर्च कम किए और तीन साल में पैसे जुटाये। यह उनकी लगन और समर्पण का प्रमाण है।

पैसे पूरे होते ही दिल्ली में कराई सर्जरी
पैसे पूरे होने पर नेनशु यानी नमन दिल्ली गई। यह उनके जीवन का एक निर्णायक कदम था। पांच महीनों में तीन जटिल सर्जरियां हुईं। यह प्रक्रिया शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत कठिन थी। दर्द और तनाव के बीच अनीता हर कदम पर साथ रहीं। उनका साथ नमन के लिए बहुत महत्वपूर्ण था। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद नेनशु आधिकारिक रूप से ‘नमन’ बन गई है। यह उनके नए जीवन की शुरुआत है।

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