अमेरिकी विदेश नीति में उलझन! तीन दिन में ही मोदी पर पलटे ट्रंप के बयान

Share on Social Media

नई दिल्ली
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर हाल ही में अमेरिका की विदेश नीति पर अपनी स्थिति स्पष्ट की थी। उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बारे में कहा था दुनिया यहां तक की अपने देश के साथ डील करने का उनका तरीका काफी अलग है। जयशंकर ने यह भी कहा था कि विदेश नीति इस तरह खुलेआम नहीं होती है, जिस तरीके से प्रेसिडेंट ट्रंप करते हैं। ट्रंप की विदेश नीति पर जयशंकर का यह बयान काफी सटीक बैठता है। ऐसा इसलिए क्योंकि वह विदेश नीति की हर बात खुलेआम बोलते हैं। कई मौकों पर तो देखा गया है कि किसी मुद्दे पर उनकी और उनकी सरकार के स्टैंड में विरोधाभासी होता है।
 
बीते तीन दिनों में भारत को लेकर डोनाल्ड ट्रंप के तेवर तल्खी भरे देखे गए हैं। लेकिन उनकी ही सरकार के अधिकारी के बयान ट्रंप के दावों से मेल नहीं खाते हैं। आपको बता दें कि 6 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर अपने पुराने अंदाज में प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने संबंधों का जिक्र किया। ट्रंप ने दावा किया कि भारत पर लगाए गए कड़े टैरिफ (शुल्कों) के बाद पीएम मोदी ने उन्हें फोन किया और बेहद सम्मानजनक लहजे में बातचीत की। ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि मोदी ने उनसे पूछा, "सर, क्या मैं आ सकता हूं?"

ट्रंप यह दिखाना चाहते थे कि उनकी टैरिफ नीति काम कर रही है और दुनिया के बड़े नेता उनके सामने झुककर समझौता करने को तैयार हैं। हालांकि तीन दिन भी नहीं बीते और उनके दावों की पोल उनकी सरकार से जुड़े लोगों ने खोल दिया। आपको बता दें कि ट्रंप का यह बयान तब आया जब भारत पहले से ही अमेरिकी सामानों पर 50% टैरिफ का सामना कर रहा है।

मोदी ने कॉल नहीं किया- सचिव का दावा
इसके ठीक तीन दिन बाद, 9 जनवरी को अमेरिका के वाणिज्य सचिव हावर्ड लुटनिक ने एक पॉडकास्ट में पूरी कहानी ही पलट दी। लुटनिक ने खुलासा किया कि भारत और अमेरिका के बीच एक बड़ा व्यापारिक समझौता होने वाला था, लेकिन वह केवल इसलिए टूट गया क्योंकि पीएम मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप को फोन नहीं किया।

लुटनिक ने कहा, "सब कुछ तैयार था, लेकिन मैंने कहा कि सौदे को फाइनल करने के लिए मोदी को राष्ट्रपति को फोन करना होगा। भारतीय पक्ष इसके लिए असहज था, इसलिए मोदी ने कॉल नहीं किया।" लुटनिक के अनुसार, भारत ने वह ट्रेन मिस कर दी और अब अमेरिका ने इंडोनेशिया और वियतनाम जैसे देशों के साथ डील कर ली है।

आखिर इतनी कंफ्यूज क्यों है US की विदेश नीति?
इस विरोधाभास के पीछे कई कारण नजर आते हैं। डोनाल्ड ट्रंप विदेशी नेताओं के साथ अपने निजी संबंधों को हमेशा बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं ताकि वह अपने घरेलू वोटरों को यह दिखा सकें कि वह एक 'स्ट्रॉन्ग मैन' हैं। वहीं, हावर्ड लुटनिक जैसे उनके अधिकारी शुद्ध रूप से 'लेन-देन' की भाषा बोलते हैं। लुटनिक का बयान बताता है कि ट्रंप प्रशासन भारत को 'पहले आओ, पहले पाओ' की नीति पर डील कर रहा है। यानी जो पहले आएगा, उसे अच्छी डील मिलेगी और जो देरी करेगा, उस पर टैक्स बढ़ता जाएगा।

अमेरिका चाहता है कि पीएम मोदी खुद फोन करके झुकें और समझौता करें, जिसे लुटनिक ने क्लोजर कॉल कहा। लेकिन भारत अपनी शर्तों पर झुकने को तैयार नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, भारत ने साफ कर दिया है कि वह किसी दबाव में डील साइन नहीं करेगा, खासकर तब जब अमेरिका उसे रूस के साथ संबंधों को लेकर धमका रहा हो।

भारत का रुख क्या होगा?
वाशिंगटन के इन विरोधाभासी बयानों ने भारत को सतर्क कर दिया है। जहां एक तरफ ट्रंप पीएम मोदी को ग्रेट फ्रेंड बताते हैं, वहीं उनकी नीतियां भारत के निर्यात को नुकसान पहुंचा रही हैं। भारत अभी भी रूस से सस्ते तेल की खरीद पर अड़ा है। अमेरिका के इस सख्त रुख के बीच, भारत अब चीन के साथ अपने सीमा विवाद को सुलझाने और व्यापारिक रिश्तों को फिर से संतुलित करने की कोशिश कर सकता है, जैसा कि हालिया कूटनीतिक हलचलों से संकेत मिले हैं।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *